मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
पुर-नूर है ज़माना सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
पर्दा उठा है किस का सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
फ़स्ल-ए-बहार आई, शक्ल-ए-निगार आई
गुलज़ार है ज़माना सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
फूलों से बाग़ महके, शाख़ों पे मुर्ग़ चहके
'अहद-ए-बहार आया सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
दिल जगमगा रहे हैं, क़िस्मत चमक उठी है
फैला नया उजाला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
आई नई हुकूमत, सिक्का नया चलेगा
'आलम ने रंग बदला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
रूह-उल-अमीं ने गाड़ा का'बे की छत पे झंडा
ता-'अर्श उड़ा फरेरा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
पढ़ते हैं 'अर्श वाले, सुनते हैं फ़र्श वाले
सुल्तान-ए-नौ का ख़ुत्बा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
दिन फिर गए हमारे, सोते नसीब जागे
ख़ुर्शीद ही वो चमका सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
प्यारे रबी'-उल-अव्वल ! तेरी झलक के सदक़े
चमका दिया नसीबा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
नौशा बनाओ उन को, दूल्हा बनाओ उन को
है 'अर्श तक ये शोहरा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
शादी रची हुई है, बजते हैं शादियाने
दूल्हा बना वो दूल्हा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
'अर्श-ए-'अज़ीम झूमे, का'बा ज़मीन चूमे
आता है 'अर्श वाला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
तेरी चमक दमक से 'आलम चमक रहा है
मेरे भी बख़्त चमका सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
बाँटा है दो-जहाँ में तू ने ज़िया का बाड़ा
दे दे हसन का हिस्सा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
मरहबा मरहबा, जद्दल-हुसैनी ! मरहबा
मरहबा मरहबा, या नूर-अल-'ऐनी ! मरहबा
शायर:
मौलाना हसन रज़ा ख़ान बरेलवी
ना'त-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
एक टिप्पणी छोड़ें
आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड * से चिह्नित हैं




