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मरहबा सल्ले-अला सल्ले-अला सल्ले-अला

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मरहबा सल्ले-अला सल्ले-अला सल्ले-अला

मरहबा सल्ले-अला सल्ले-अला सल्ले-अला

मरहबा सल्ले-अला सल्ले-अला सल्ले-अला

 

आप जब आए तो ये ग़ैब से आती थी सदा

मरहबा सल्ले-अला सल्ले-अला सल्ले-अला

 

हर तरफ़ शोर हुआ रब के पयंबर आए

हैं जो हम सब के शफ़ी आज वो सरवर आए

सारे आलम के लिए बन के वो रहबर आए

हैं जो महबूब-ए-ख़ुदा शाफ़े-ए-महशर आए

आप को देख के ये चाँद-सितारों ने कहा

मरहबा सल्ले-अला सल्ले-अला सल्ले-अला

 

क़त्ल का कर के इरादा वो चले थे घर से

कह रहे थे ये बड़ी शान बड़े तेवर से

जिस्म कर देंगे जुदा आज नबी का सर से

जब लड़ी उन की नज़र चेहरा-ए-पैग़ंबर से

गिर के सरकार के क़दमों पे उमर ने ये कहा

मरहबा सल्ले-अला सल्ले-अला सल्ले-अला

 

बू-जहल ने ये कहा काम मेरा सुलझा दें

शान वाले हैं अगर शान हमें दिखला दें

ऐ नबी ! हम पे यही एक करम फ़रमा दें

मेरी मुट्ठी में है क्या चीज़ हमें बतला दें

झूम कर कलमा शह-ए-दीन का कंकर ने पढ़ा

मरहबा सल्ले-अला सल्ले-अला सल्ले-अला

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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