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मेरे आक़ा की है शान सबसे अलग

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मेरे आक़ा की है शान सबसे अलग

मेरे आक़ा की है शान सबसे अलग
जैसे रुतबे में क़ुरआन सबसे अलग

आक़ा मेरे मदनी आक़ा आक़ा मेरे मदनी आक़ा

शान-ए-ख़ैर-उल-बशर, ख़ातम-उल-अंबिया
एक पैग़ंबर, एक इंसान सबसे अलग
जैसे रुतबे में क़ुरआन सबसे अलग

मेरे आक़ा की है शान सबसे अलग
आक़ा मेरे मदनी आक़ा आक़ा मेरे मदनी आक़ा

शफ़क़ते बे-सबब रहमत-ए बे-तलब
उनकी बख़्शिश का उन्वान सबसे अलग
जैसे रुतबे में क़ुरआन सबसे अलग

मेरे आक़ा की है शान सबसे अलग
आक़ा मेरे मदनी आक़ा आक़ा मेरे मदनी आक़ा

अर्श क़दमों में, पैबंद पोशाक में
हैं दो आलम के सुलतान सबसे अलग
जैसे रुतबे में क़ुरआन सबसे अलग

मेरे आक़ा की है शान सबसे अलग
आक़ा मेरे मदनी आक़ा आक़ा मेरे मदनी आक़ा

उनको देखा नहीं फिर भी पहचान लें
मेरी आँखों का ईमान सबसे अलग
जैसे रुतबे में क़ुरआन सबसे अलग

मेरे आक़ा की है शान सबसे अलग
आक़ा मेरे मदनी आक़ा आक़ा मेरे मदनी आक़ा

उनके दर के गदा, सर पे ताज-ए-अना
हम फ़क़ीरों की पहचान सबसे अलग
जैसे रुतबे में क़ुरआन सबसे अलग

मेरे आक़ा की है शान सबसे अलग
आक़ा मेरे मदनी आक़ा आक़ा मेरे मदनी आक़ा

नात कहते हैं दिल की ज़मीनों में हम
शायर अपना है मैदान सबसे अलग
जैसे रुतबे में क़ुरआन सबसे अलग

मेरे आक़ा की है शान सबसे अलग
आक़ा मेरे मदनी आक़ा आक़ा मेरे मदनी आक़ा

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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