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मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखो सलाम

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मुस्तफा ﷺ जाने रहमत पे लाखो सलाम

मुस्तफा  ﷺ जाने रहमत पे लाखो सलाम

शम ए बजमे हिदायत पे लाखो सलाम

 

शहरे यारे ईरम ताजदारे हरम

नौ बहारे शफ़ात पे लाखो सलाम

 

हम गरीबो के आका  ﷺ पे बेहद दुरूद

हम फकीरो के सरवत पे लाखो सलाम

 

जिस सुहानी घडी चमका तैयबा का चांद

उस दिल अफरोज ए सा’अत पे लाखो सलाम

 

जिस तरफ उठ गई दम में दम आ गया

उस निगाहे इनायत पे लाखो सलाम

 

जिसके माथे शफा’अत का शहरा सजा

उस जबीने सआदत पे लाखो सलाम

 

जिन्के सजदे को महराबे काबा झुकी

उन भवो की लताफत पे लाखो सलाम

 

गौसे आज़म इमामो तो कावन नुका

जलवा-ए-शान-ए-कुदरत पे लाखो सलाम

 

दूर ओ नज़दीक के सुनने वाले वो कान

काने लाले करामत पे लाखो सलाम

 

काश महसर में उनकी आमद हो और

भेजे सब उनकी सौकत पे लाखो सलाम

 

सय्यदा ज़ाहीरा तय्यबा ताहिरा

जान-ए-अहमद  ﷺ की राहत पे लाखो सलाम

 

डाल दी कल्ब में अजमते मुस्तफा

सय्यदी आलाहज़रत पे लाखो सलाम

 

 

मुझसे खिदमत के क़ुदसी कहे हा रज़ा

मुस्तफा जाने रहमत पे लाखो सलाम

शम ए बजमे हिदायत पे लाखो सलाम

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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