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नबी का ज़िक्र ही खुदा का ज़िक्र है

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नबी का ज़िक्र ही खुदा का ज़िक्र है
नबी का ज़िक्र ही खुदा का ज़िक्र है
नबी की बात ही खुदा की बात है
यदुल्लाह कह दिया तो साबित हो गया
नबी का हाथ ही खुदा का हाथ है

नबी का ज़िक्र ही खुदा का ज़िक्र है
नबी की बात ही खुदा की बात है

नबी का लब पर जो ज़िक्र है बेमिसाल आया कमाल आया
जो हिज्रे तयबाह में याद बन कर, ख़याल आया कमाल आया

तेरी दुआओं ही की बदौलत, अज़ाबे रब्ब से बचे हुए हैं
जो हक़ में उम्मत के तेरे लब पर सवाल आया कमाल आया

कौसर भी इन्हीं की है, जन्नत भी इन्हीं की है
सच पूछो तो अल्लाह की हर चीज़ इन्हीं की है

न बन सकी है न बन सकेगा मिसाल तेरी जवाब तेरा

तू शाहे ख़ुबाँ, तू जाने जानां
है चेहरा उम्मुल किताब तेरा

तू सबसे अव्वल तू सबसे आखिर
मिला है हुस्ने दवाम तुझको
है उम्र लाखों बरस की तेरी
मगर है ताज़ा शबाब तेरा

अपनी रेहमत के समंदर में उतर जाने दे
बेठिकाना हूँ अजल से , मुझे घर जाने दे

मौत पर मेरी शहीदों की भी रश्क आएगा
अपने क़दमों से लिपट कर मुझे मर जाने दे

कौसर भी इन्हीं की है, जन्नत भी इन्हीं की है
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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