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नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह

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नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह

नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह !
हमें तो आप ही का है सहारा या रसूलल्लाह !

नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह !

हूँ सर से पाओं तक डूबा हुआ ग़म के समंदर में
नहीं आता नज़र कोई किनारा या रसूलल्लाह !

नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह !

तलातुम-ख़ेज़ है दरिया , भंवर में है मेरी कश्ती
नज़र आता नहीं कोई किनारा या रसूलल्लाह !

नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह !

तड़पता है ये दिल मेरा , तरसती हैं मेरी आँखें
बुलालो अब मदीने में दुबारा या रसूलल्लाह !

नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह !

तड़पता है मेरा दिल और तरसती हैं मेरी आँखें
बुलालो अब मदीने में दुबारा या रसूलल्लाह !

नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह !

ख़ुदा जब तुमसे फरमाए के लाओ अपनी उम्मत को 
हमारी तरफ भी कर देना इशारा या रसूलल्लाह !

नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह !

ख़ुदा जब तुमसे फरमाए के लाओ अपनी उम्मत को 
हमारी सिम्त भी करना इशारा या रसूलल्लाह !

नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह !

बरोज़-ए-हश्र मेरे इस यक़ीं की लाज रख लेना 
तुम्हारा हूँ , तुम्हारा हूँ, तुम्हारा या रसूलल्लाह !

नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह !

हकीकत में बहोत बड़ कर के है 'अर्श-ए-मु'अल्ला से
ज़मीं जिस पर हो नक़्श-ए-पा तुम्हारा या रसूलल्लाह !

नहीं है कोई दुनिया में हमारा या रसूलल्लाह !

दम-ए-आख़िर ज़रा मुश्ताक़ पर इतना करम करना 
हो इसके लब पे भी कलमा तुम्हारा या रसूलल्लाह !

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Mohammad Wasim

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