नूर से अपने सरवर-ए-'आलम दुनिया जगमगाने आए
ग़म के मारों, दुखियारों को वो सीने से लगाने आए
दुनिया जगमगाने आए, दुनिया जगमगाने आए
नूर-ए-निगाह-ए-अंबिया, मेरे हुज़ूर आ गए
शान-ओ-निशान-ए-किब्रिया, मेरे हुज़ूर आ गए
नूर से अपने सरवर-ए-'आलम दुनिया जगमगाने आए
निखरा हुवा है रू-ए-गुल, फैली हुई है बू-ए-गुल
बन के बहार-ए-जाँ-फ़िज़ा, मेरे हुज़ूर आ गए
नूर से अपने सरवर-ए-'आलम दुनिया जगमगाने आए
अश्कों से भर के झोलियाँ आँखें बिछा दो राह में
सल्ले-'अला की दो सदा, मेरे हुज़ूर आ गए
नूर से अपने सरवर-ए-'आलम दुनिया जगमगाने आए
चटकी हुई है चाँदनी, फैली हुई है रौशनी
दरिया रवाँ है नूर का, मेरे हुज़ूर आ गए
नूर से अपने सरवर-ए-'आलम दुनिया जगमगाने आए
साइम ! कमाल-ए-ज़ौक़ से, क़ल्ब-ओ-नज़र को शौक़ से
राहों में आज दो बिछा, मेरे हुज़ूर आ गए
ना'त-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
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