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नसीबों को जगाया है अली ने | मे अपना बनाया है अली ने।

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नसीबों को जगाया है अली ने | मे अपना बनाया है अली ने।

नसीबों को जगाया है अली ने,

हमे अपना बनाया है अली ने।

 

मेरा इमां बचाया है अली ने,

दिल ए मुर्दा जिलाया है अली ने।

 

इमामों की शहादत की रिवायत,

बहुत पहले बताया है अली ने।

 

मिटेगी मुस्तफा (ﷺ) की नस्ल कैसे,

के जब शजरा चलाया है अली ने।

 

फिदा करने को दीन ए मुस्तफा (ﷺ) पर,

भरा कुंबा लिटाया है अली ने।

 

गमों की धूप में जब भी सताया,

मुझे आ कर बचाया है अली ने।

 

 

वही मौला है हाकिम है हमारे,

खिलाया है पिलाया है अली ने।


 

अली के नाम पर क्यूं ना मारे हम,

हमे जीना सिखाया है अली ने।

 

गमों से टूट कर बिखरा हुआ था,

मुहब्बत में पिरोया है अली ने।

 

बरेली के मुजद्दिद ने लिखा है,

मुझे पहरा बिठाया है अली है।

 

उलट देते थे वो देवबंदी टोली,

अली हशमत बनाया है अली ने।

 

 

अबुल फातेह किया है ला फतह ने,

शहादत जगमगाया है अली ने।

 

जलाल ए हैदरी हशमत के बेटे,

इन्हे नेज़ा थमाया है अली ने।


 

वो हाफ़िज़ असकरी मजज़ूब अली के,

उन्हे दुनिया घुमाया है अली ने।

 

घटादे रुतबा वो मशहुद का क्या,

मियां परवां चढ़ाया है अली ने।


 

कलंदर कर दिया मशहूद रज़ा को,

लहद से आज़माया है अली ने।

 

चरागे चिश्त की किरणों से रौशन,

फरीदे हक़ सजाया है अली ने।

 

है बाजी वक्त की राबिया बसरी,

ये ज़हरा ने किया है या अली ने।

 

इमामे हक़ किया इदरीस रज़ा को,

बहुत अच्छा बनाया है अली ने।
 

है कासे में समंदर की तरह वो,

सखी मुर्शीद मिलाया है अली ने।

 

हुजूमे पुरफितन की रद्द की खातिर,

निगाहों से पिलाया है अली ने।


 

सनाबिल ने मिलाया है अली ने,

सनाबिल से मिलाया है अली ने।

 

चलो हशमत नगर इमां जिलाए,

बड़ा फैजा़ँ लुटाया है अली ने।

 

नजफ से नूर की बरसात बरसे,

नगर हशमत बसाया है अली ने।


 

जो लड़ता है नबी  (ﷺ) के दुश्मनों से,

उसे मुज़्दा सुनाया है अली ने।

 

 

यही ऐलान है हम सुन्नियों का,

पता हक़ का बताया है अली ने।

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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