मरहबा या मुस्तफा मरहबा या मुस्तफा
मरहबा या मुस्तफा मरहबा या मुस्तफा
नूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गया
आये प्यारे मुस्तफा अहलव सहलान मरहबा
सुब्ह तयबाह में हुई बंटता है बाड़ा नूर का
सदक़ा लेने नूर का आया है तारा नूर का
नूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गया
आये प्यारे मुस्तफा अहलव सहलान मरहबा
बारविह के चाँद का मुजरा है सजदा नूर का
बारह बुर्ज़ों से जुका एक एक सितारा नूर का
नूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गया
आये प्यारे मुस्तफा अहलव सहलान मरहबा
ताजवाले देख कर तेरा इमामा नूर का
सर जुकाते हैं इलाही बोल बाला नूर का
नूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गया
आये प्यारे मुस्तफा अहलव सहलान मरहबा
अये रज़ा ये अहमदे नूरी का फैज़े नूर है
हो गयी मेरी ग़ज़ल पड़ कर कसीदा नूर का
नूर हर सू छा गया है दिन ख़ुशी का आ गया
आये प्यारे मुस्तफा अहलव सहलान मरहबा
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