पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
ये दर महबूब-ए-सुब्हानी का दर है
भिकारी बन के आओ, ताजदारो !
पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
मुरीदी ला-तख़फ़ है उन का फ़रमाँ
न घबराओ ज़रा भी, ग़म के मारो !
पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
तुम्हारी रीत है बेड़े तिराना
मोरी नैया भी, मीराँ ! पार उतारो
पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
तुम्हें मुश्किल नहीं बिगड़ी बनाना
हमारे काज भी, मीराँ ! सँवारो
पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
ये ज़र्रे कूचा-ए-बग़दाद के हैं
करो सज्दे यहाँ, ऐ चाँद-तारो !
पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
पुकारो हर घड़ी या ग़ौस-ए-आ'ज़म
मिलेगा चैन दिल को, बे-क़रारो !
पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
रहे हर-दम ख़याल-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म
गुज़ारो ज़िंदगी बस यूँ गुज़ारो
पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
करो तुम नाम-ए-मीराँ का वज़ीफ़ा
क़रार-ए-ज़िंदगी है, बे-क़रारो !
पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
शह-ए-बग़दाद देखो आ रहे हैं
मुबारक हो तुम्हें, ऐ बे-सहारो !
पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
निछावर कर दो अपने जान-ओ-तन को
जनाब-ए-ग़ौस का सदक़ा उतारो
पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
हो सारी रात ज़िक्र-ए-ग़ौस-उल-आ'ज़म
दीवानो ! ग्यारहवीं शब यूँ गुज़ारो
पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
दर-ए-बग़दाद से मिलता है सब कुछ
चलो, साजिद ! वहाँ दामन पसारो
पुकारो, शाह-ए-जीलाँ को पुकारो
बदल जाएगी क़िस्मत, बे-सहारो !
ना'त-ख़्वाँ:
शेर अली और मेहर अली
अक़्सा अब्दुल हक़
अफ़ज़ल साबरी
क़ारी रियाज़ुद्दीन
मुहम्मद अफ़ज़ल नोशाही
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