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क़ादरा ! सरवरा ! रहनुमा ! दस्तगीर

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क़ादरा ! सरवरा ! रहनुमा ! दस्तगीर


क़ादरा ! सरवरा ! रहनुमा ! दस्तगीर,

गौस-ए-आज़म ईमाम-ए-मुबी़ं बे-नज़ीर।

 

तु जिस चाहे दे, जिस क़दर छाहे दे,

तेरी बख्शीश निराली अता बे-नज़ीर।

 

ज़िक्र से तेरे टल जाएं सब मुश्किलें,

नाम से तेरे पाए रिहाई असीर।
 

तेरे ज़ेर-ए-क़दम औलिया, अस्फ़िया,

सरवरे सरवारा ! पीर-ए-रौशन ज़मीर।

 

तू है आईना-ए-सीरत-ए-मुस्तफा (ﷺ)

तू अलीमो-खबीरो-बशीरो-नज़ीर।

 

ये वज़ीफ़ा है हर ग़म का दरमां वक़ार,

गौस-ए-आजम मदद ! अल-मदद दस्तगीर।

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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