क़ादरा ! सरवरा ! रहनुमा ! दस्तगीर,
गौस-ए-आज़म ईमाम-ए-मुबी़ं बे-नज़ीर।
तु जिस चाहे दे, जिस क़दर छाहे दे,
तेरी बख्शीश निराली अता बे-नज़ीर।
ज़िक्र से तेरे टल जाएं सब मुश्किलें,
नाम से तेरे पाए रिहाई असीर।
तेरे ज़ेर-ए-क़दम औलिया, अस्फ़िया,
सरवरे सरवारा ! पीर-ए-रौशन ज़मीर।
तू है आईना-ए-सीरत-ए-मुस्तफा (ﷺ)
तू अलीमो-खबीरो-बशीरो-नज़ीर।
ये वज़ीफ़ा है हर ग़म का दरमां वक़ार,
गौस-ए-आजम मदद ! अल-मदद दस्तगीर।
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