क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
मुस्तफा का घराना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
पल रहे हैं जहां से ये दोनों जहां
वो सखी आस्ताना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
दर्द मंदों के सर पर है साया-फ़िगन
आपका शामियाना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
तुमसे मंसूब है ज़िन्दगी का निसाब
हश्र तक ये फ़साना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
ये नकीरैन बोले मुझे क़ब्र में
मुस्तफा का दीवाना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
हुक्म था के अदा हों नमाज़ें पचास
आपका आना जाना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
जिनके चहेरे थे ग़मग़ीन खुश हो गए
आपका मुस्कुराना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
इतरत-ए-फातिमा पर उजागर निसार
सैय्यिदा का घराना सलामत रहे
क़ादरी आस्ताना सलामत रहे
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