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रब की रहमत के तलबगार ! चलो ना'त पढ़ें

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रब की रहमत के तलबगार ! चलो ना'त पढ़ें

रब की रहमत के तलबगार ! चलो, ना'त पढ़ें
आ गए सय्यिद-ए-अबरार, चलो, ना'त पढ़ें

गर दवा काम नहीं करती तो इक काम करो
ठीक हो जाएगा बीमार, चलो, ना'त पढ़ें

उन के दीवानें कहेंगे ये ब-रोज़-ए-महशर
आ गए सय्यिद-ए-अबरार, चलो, ना'त पढ़ें

मुझ से कहती है मेरे दिल के धड़कने की सदा
होगा सरकार का दीदार, चलो, ना'त पढ़ें

जब सहाबा ने कहा, ज़िक्र करो आक़ा का
बोले ये हज़रत-ए-हस्सान, चलो, ना'त पढ़ें

हश्र में बोलेंगे इक साथ ये जामी, सा'दी
ए बरेली के रज़ा खान ! चलो, ना'त पढ़ें

'इज़्ज़तें देगा ख़ुदा दोनों जहाँ में, ए न'ईम !
होगी तक़दीर भी बेदार, चलो, ना'त पढ़ें


ना'त-ख़्वाँ:
अहमद-उल-फ़त्ताह
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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