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सात समंदर पर है भारी क़तरा गौस ए आज़म का

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सात समंदर पर है भारी क़तरा गौस ए आज़म का


चांद सितारों से बढ़ कर है ज़र्रा गौस ए आज़म का,

सात समंदर पर है भारी क़तरा गौस ए आज़म का।


अब्दुल कादिर को क़ादीर ने ऐसी कुदरत बख्शी है,

क़ब्र से मुर्दा उठ के लगाए नारा गौस ए आज़म का।

 

कस्मे दे कर ही खिलाए अब्दुल कादिर को कादिर,

मर्ज़ी ए मौला का होता है लुक्मा गौस ए आज़म का।

 

सत्तर घर में कैसे पहुंचे जब ये समझना मुश्किल था,

पेड़ के पत्तों पर देखा तब जलवा गौस ए आज़म का।

 

बोले फरिश्ते इसको न छेड़ो ये है सग ए गौस ए आज़म,

देखो गले में इसके पड़ा है पट्टा गौस ए आज़म का।

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Mohammad Wasim

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