चांद सितारों से बढ़ कर है ज़र्रा गौस ए आज़म का,
सात समंदर पर है भारी क़तरा गौस ए आज़म का।
अब्दुल कादिर को क़ादीर ने ऐसी कुदरत बख्शी है,
क़ब्र से मुर्दा उठ के लगाए नारा गौस ए आज़म का।
कस्मे दे कर ही खिलाए अब्दुल कादिर को कादिर,
मर्ज़ी ए मौला का होता है लुक्मा गौस ए आज़म का।
सत्तर घर में कैसे पहुंचे जब ये समझना मुश्किल था,
पेड़ के पत्तों पर देखा तब जलवा गौस ए आज़म का।
बोले फरिश्ते इसको न छेड़ो ये है सग ए गौस ए आज़म,
देखो गले में इसके पड़ा है पट्टा गौस ए आज़म का।




