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सल्ले अला पुकारो सरकार आ रहे हैं | मौलूद की घड़ी है चलो आमिना के घर पर

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सल्ले अला पुकारो सरकार आ रहे हैं | मौलूद की घड़ी है चलो आमिना के घर पर

सल्ले-'अला पुकारो, सरकार आ रहे हैं
उठो, ऐ बे-सहारो ! सरकार आ रहे हैं

मौलूद की घड़ी है, चलो आमिना के घर पर
ऐ ख़ुल्द की बहारो ! सरकार आ रहे हैं

जो माँगना है माँगो, जो लेना है सो ले लो
दुनिया के ताजदारो ! सरकार आ रहे हैं

सरकार-ए-दो-जहाँ की ता'ज़ीम लाज़िमी है
झुक जाओ, चाँद-तारो ! सरकार आ रहे हैं

जन्नत के दर खुले हैं, रहमत बरस रही है
क्या ग़म है, ग़म के मारो ! सरकार आ रहे हैं



घर आमिना दे हो गई आमद हुज़ूर दी
वेखण फ़रिश्ते आप दा रुख़्सार आ गए

सारे गुनाहगाराँ दी अज 'ईद हो गई
रब दे पियारे, उम्मत दे ग़म-ख़्वार आ गए

ख़ुशियाँ दा वेला आ गया, ग़म दूर हो गए
दुखियाँ दिलाँ दे चैन ते क़रार आ गए

भर लो करम नाल झोलियाँ, आ जाओ मँगतेयो !
रहमत लुटावण दो-जग दे मुख़्तार आ गए


ना'त-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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