सरकार आ रहे हैं, सरकार आ रहे हैं
सरकार आ रहे हैं, सरकार आ रहे हैं
नूर-ए-ख़ुदा ने क्या क्या जल्वे दिखा दिए हैं
सीने किए हैं रौशन, दिल जगमगा दिए हैं
उन की महक ने दिल के गुंचे खिला दिए हैं
जिस राह चल दिए हैं, कूचे बसा दिए हैं
सरकार आ रहे हैं, सरकार आ रहे हैं
सरकार आ रहे हैं, सरकार आ रहे हैं
आँखें किसी ने माँगी, जल्वा किसी ने माँगा
बढ़ कर के उस से पाया जितना किसी ने माँगा
मेरे करीम से गर क़तरा किसी ने माँगा
दरिया बहा दिए हैं, दुर बे-बहा दिए हैं
सरकार आ रहे हैं, सरकार आ रहे हैं
सरकार आ रहे हैं, सरकार आ रहे हैं
दोज़ख़ के डर से लर्ज़ा हर एक फ़र्द होगा
मेरे नबी को कितना उम्मत का दर्द होगा
अल्लाह ! क्या जहन्नम अब भी न सर्द होगा
रो रो के मुस्तफ़ा ने दरिया बहा दिए हैं
सरकार आ रहे हैं, सरकार आ रहे हैं
सरकार आ रहे हैं, सरकार आ रहे हैं
जो जी में आए वो दो, अब तो तुम्हारी जानिब
पा लो हमें या खो दो, अब तो तुम्हारी जानिब
आने दो या डुबो दो, अब तो तुम्हारी जानिब
कश्ती तुम्हीं पे छोड़ी, लंगर उठा दिए हैं
सरकार आ रहे हैं, सरकार आ रहे हैं
सरकार आ रहे हैं, सरकार आ रहे हैं
अहल-ए-नज़र में तेरा ज़ेहन-ए-रसा मुसल्लम
दुनिया के 'इल्म-ओ-फ़न में है तेरी जा मुसल्लम
मुल्क-ए-सुख़न की शाही तुझ को, रज़ा ! मुसल्लम
जिस सम्त आ गए हो सिक्के बिठा दिए हैं
सरकार आ रहे हैं, सरकार आ रहे हैं
सरकार आ रहे हैं, सरकार आ रहे हैं
तज़मीन:
सैफ़ रज़ा कानपुरी
कलाम:
इमाम अहमद रज़ा ख़ान
ना'त-ख़्वाँ:
सैफ़ रज़ा कानपुरी
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