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सरकार ए गौस ए आज़म नज़्र ए करम खुदारा

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सरकार ए गौस ए आज़म नज़्र ए करम खुदारा

सरकार ए गौस ए आज़म नज़्र ए करम खुदारा,

मेरा ख़ाली कासा भर दो मैं फ़कीर हुं तुम्हारा।


 

झोली को मेरी भर दो वरना कहेगी दुनिया,


ऐसे सखी का मंगता फिरता है मारा मारा।

 

सब का कोई न कोई दुनिया में आसरा है,

मेरा बा–जुज़ तुम्हारे कोई नहीं सहारा।

 

मीरा बने हैं दूल्हा महफिल सजी हुई है,

सब औलिया बाराती क्या खूब है नज़ारा।

 

ये अता ए दस्तगीरी कोई मेरे दिल से पूछे,

वहीं आ गए मदद को मैंने जब जहां पुकारा।

 

ये तेरा करम है या गौस जो बना लिया है अपना,

कहां मुझसा ये कमिना कहां सिलसिला तुम्हारा।

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Mohammad Wasim

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