इश्क का उन्वान, ताज़ उल औलिया,
सुन्नियों की जान, ताज़ उल औलिया।
जिस के फूलों में है तैबा की महक,
वो हसीं गुलदान, ताज़ उल औलिया।
हो रहे हैं दिल से उश्शाक़-ए-नबी,
आप पर कुर्बान, ताज़ उल औलिया।
हम गरीबों पर तुम्हारा, ऐ शाहा,
खूब है इहसान, ताज़ उल औलिया।
आप का उर्स-ए-मुकद्दस आ गया,
लौट कर सुल्तान, ताज़ उल औलिया।
है रवा'न आठों पहर दरबार से,
आप का फ़ैज़ान, ताज़ उल औलिया।
बातिलों का आशियाना आज तक,
तुम से है वीरान, ताज़ उल औलिया।
हम गुलामाँ-ए-नबी को चाहिए,
आप का फ़ैज़ान, ताज़ उल औलिया।
तेरे क़दमों से लगा गुलज़ार जब,
हो गया ज़ीशान, ताज़ उल औलिया।
हो गया गुलज़ार जब से आप का,
हो गया ज़ीशान, ताज़ उल औलिया।
हो आता गुलज़ार के हाथों यहाँ,
आप का फ़ैज़ान, ताज़ उल औलिया।
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