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सिक्का चलेगा आमेना के लाल का

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सिक्का चलेगा आमेना के लाल का
सिक्का चलेगा आमेना के लाल का
सिक्का चलेगा आमेना के लाल का

पुरनूर है ज़माना , सुब्हे शबे विलादत
पर्दा उठा है किसका , सुब्हे शबे विलादत

फैसले बहार आयी , शक्ले निगार आयी
गुलज़ार है ज़माना , सुब्हे शबे विलादत

दिल जगमगा रहे हैं , क़िस्मत चमक उठी है
फैला नया उजाला , सुब्हे शबे विलादत

रूहुल अमीन ने गाड़ा काबे की छत पे झंडा
ता-अर्श उदा फरेरा , सुब्हे शबे विलादत

बांटा है दो जहां में तूने जिया का बाड़ा
देदे हसन का हिस्सा सुब्हे शबे विलादत

आयी नयी हुकूमत सिक्का नया चलेगा
आलम ने रंग बदला सुब्हे शबे विलादत

सिक्का चलेगा आमेना के लाल का
सिक्का चलेगा आमेना के लाल का

सुबह तयबाह में हुई बंटता है बाड़ा नूर का
सदक़ा लेने नूर का आया है तारा नूर का

जो गदा देखो लिए जाता है तोडा नूर का
नूर की सरकार है क्या इसमें तोडा नूर का

में गदा तु बादशाह भरदे पियाला नूर का
नूर दिन दूना तेरा दे डाल सदक़ा नूर का

ताज्वाले देख कर तेरा इमामा नूर का
सर जुकाते हैं इलाही बोल बाला नूर का

तेरी नस्ले पाक में है बच्चा बच्चा नूर का
तु है एने नूर तेरा सब गराना नूर का

बारवी के चाँद का गुजरा है सजदा नूर का
बारा बुर्ज़ों से जुका एक एक सितारा नूर का

सिक्का चलेगा आमेना के लाल का
सिक्का चलेगा आमेना के लाल का

मोमिनों वक़्ते अदब है , आमदे महबूबे रब है
जाए आदाबो तरब है आमदे शाहे अरब है

बज रहे हैं शादियाने, बूत लगे कलमा सुनाने
हर ज़बां पे हैं तराने आमदे शाहे अरब है

सिक्का चलेगा आमेना के लाल का
सिक्का चलेगा आमेना के लाल का

पेशे हक़ मुज़्दा शफ़ाअत का सुनाते जाएंगे
आप रोते जाएंगे , हमको हसाते जाएंगे

लो वो आये मुस्कुराते हम असीरों की तरफ
खीरमने इसयां पे अब बिजली गिराते जाएंगे

वुसअतें दी हैं खुदा ने दामने मेहबूब को
जुर्म खुलते जाएंगे और वो छुपाते जाएंगे

सिक्का चलेगा आमेना के लाल का
सिक्का चलेगा आमेना के लाल का

जब तलाक ये चाँद तारे झिलमिलाते जाएंगे
तब तलक जश्ने विलादत हम मनाते जाएंगे

हश्र तक जश्ने विलादत हम मनाते जाएंगे
मरहबा या मुस्तफा की धूम मचाते जाएंगे

ज़ूम कर सारे कहो आक़ा की आमद मरहबा
हश्र में भी हम यही नारा लगाते जाएंगे

या रसूलल्लाह का नारा लगाओ जोर से
क्यूंकि दुश्मन मुंह फुलाते बुलबुलाते जाएंगे

सिक्का चलेगा आमेना के लाल का
सिक्का चलेगा आमेना के लाल का

तुम करो जश्ने विलादत की ख़ुशी में रौशनी
वो तुम्हारी गोरे तीरां जगमगाते जाएंगे

सुब्हे सादिक हो गयी अब आमेना के घर चलें
नूर की बरसात होगी , हम नहाते जाएंगे

हश्र में ज़ेरे लिवा-इ-हम्द अये अत्तार हम
नाते सुल्ताने मदीना गुनगुनाते जाएंगे

सिक्का चलेगा आमेना के लाल का
सिक्का चलेगा आमेना के लाल का
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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