भाषा:

खोजें

ताज वालों के सरों पर पाये अक़दस आप के

  • यह साझा करें:
ताज वालों के सरों पर पाये अक़दस आप के

ताज वालों के सरों पर पा-ए-अक़दस आपके

ताज वालों के सरो पर पा-ए-अक़दस आपके
मैं भी चूमूंगा पयंबर पा-ए-अक़दस आपके

 

आपके कदमों के नीचे नर्म, पत्थर हो गए
क्या कहूं अल्लाह हू अकबर पा-ए-अक़दस आपके

 

इसलिए मक्का मदीना बन गए दोनों हरम
आ गए जब बंदा परवर पा-ए-अक़दस आपके

 

ख़ाक-ए-पा ए मुस्तफा की खाई क़ुरआं ने क़सम
तैय्यब व ताहिर मुनव्वर पा-ए-अक़दस आपके

 

सुस्त और कमरू सवारी तेज़ हो जाती वहीं
जब लगाते एक ठोकर पा-ए-अक़दस आपकए

 

क्या मकां हो ला मकां तक छाप है क़दमैन की
स़िदरा ओ रफ़रफ़ से ऊपर पा-ए-अक़दस आपके

 

मेरी किस्मत भी खुलेगी मेरे घर भी आएंगे
देखूॅंगा मैं जिंदगी भर पा-ए-अक़दस आपके

 

हश्र तक मिटता नहीं है, मिट गया जो आप पर!
ऐ उजागर थाम मिट कर पा-ए-अक़दस आपके

टैग:
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

एक टिप्पणी छोड़ें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड * से चिह्नित हैं

Your experience on this site will be improved by allowing cookies Cookie Policy