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तल अल बदरू अलैना

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तल अल बदरू अलैना

तल अल बदरू अलैना तल अल बदरू अलैना
तल अल बदरू अलैना तल अल बदरू अलैना

आए सरकारे मदीना , लाये अनवारे मदीना
है क़दम बोसे रिसालत, गुलो गुलज़ारे मदीना
कुन्दनी रंग है गहरा, है लिबास साज सुनेहरा
चांदनी रात ने पहना

तल अल बदरू अलैना तल अल बदरू अलैना
तल अल बदरू अलैना तल अल बदरू अलैना

लोगों! आवाज़ दो सब को, देख लो आ क़ासिदे रब्ब को
रोशनी गारे हिरा की मिल गयी पर्दा-इ-शब् को
बारिशे नज्मो कमर है , आज से हुक्मे सहर है
रात को रात ना कहना

तल अल बदरू अलैना तल अल बदरू अलैना
तल अल बदरू अलैना तल अल बदरू अलैना

दिल ने पायी हैं मुरादें, उनकी राहों को सजा दें
गुल बिछाए हैं सबा ने , आओ हम आँखें बिछा दें
चाँद उभरा है लिए आज, मिनसनी-आतील वदा आज
वाजबाषुकरु अलैना

तल अल बदरू अलैना तल अल बदरू अलैना
तल अल बदरू अलैना तल अल बदरू अलैना

हाशमी ओ मुत्तलिबी है , फखरे उम्मी ओ अबी है
आप ही हक़ के नबी हैं, दाफा-इ-तीरां शबी हैं
मुज़्दा हो नव-इ-बशर को , अब तमन्ना-इ-सहर को
कश्ता-इ-शब् नहीं रहना

तल अल बदरू अलैना तल अल बदरू अलैना
तल अल बदरू अलैना तल अल बदरू अलैना

आए सरकारे मदीना , लाये अनवारे मदीना
है क़दम बोसे रिसालत, गुलो गुलज़ारे मदीना
कुन्दनी रंग है गहरा, है लिबास साज सुनेहरा
चांदनी रात ने पहना

तल अल बदरू अलैना तल अल बदरू अलैना
तल अल बदरू अलैना तल अल बदरू अलैना
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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