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तुम पर लाखों सलाम आक़ा

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तुम पर लाखों सलाम आक़ा

तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !
तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !

सब से आ'ला 'इज़्ज़त वाले ! ग़लबा-ओ-क़हर-ओ-ताक़त वाले !
हुरमत वाले ! करामत वाले ! तुम पर लाखों सलाम

तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !
तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !


आप का चाहा रब का चाहा, रब का चाहा आप का चाहा
रब से ऐसी चाहत वाले ! तुम पर लाखों सलाम

तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !
तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !


रब के प्यारे ! राज-दुलारे ! हम हैं तुम्हारे, तुम हो हमारे
ए दामान-ए-रहमत वाले ! तुम पर लाखों सलाम

तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !
तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !


'अर्श-ए-'उला पर रब ने बुलाया, अपना जल्वा-ए-ख़ास दिखाया
ख़ल्वत वाले ! जल्वत वाले ! तुम पर लाखों सलाम

तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !
तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !


तख़्त तुम्हारा 'अर्श ख़ुदा का, मुल्क-ए-ख़ुदा है मुल्क तुम्हारा
रब की आ'ला ख़िलाफ़त वाले ! तुम पर लाखों सलाम

तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !
तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !


दे दिए तुम को अपने ख़ज़ाने, रब्ब-ए-'इज़्ज़त रब्ब-ए-'उला ने
दोनों जहाँ की ने'मत वाले ! तुम पर लाखों सलाम

तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !
तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !


तुम को देखा हक़ को देखा, आप की सूरत उस का जल्वा
अच्छी अच्छी सूरत वाले ! तुम पर लाखों सलाम

तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !
तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !


सूरत-ए-अक़दस से हक़ ज़ाहिर, कलिमा पढ़ते देख के काफ़िर
ए हक़्क़ानी सूरत वाले ! तुम पर लाखों सलाम

तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !
तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !


चश्म-ए-सर ने हक़ को देखा, दिल ने हक़ को हक़ ही जाना
ए हक़्क़ानी सूरत वाले ! तुम पर लाखों सलाम

तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !
तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !


आप का साया कैसे होता, आप हैं नूर-ए-हक़ का साया
ज़िल्ल-ए-रहमत तल'अत वाले ! तुम पर लाखों सलाम

तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !
तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !


आप का दम है फ़र्श की ज़ीनत और क़दम है 'अर्श की ज़ीनत
हुस्न-ओ-जमाल-ओ-लताफ़त वाले ! तुम पर लाखों सलाम

तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !
तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !, तुम पर लाखों सलाम, आक़ा !


ख़्वाब में जल्वा अपना दिखाओ, नूरी को तुम नूरी बनाओ
ए चमकीली रंगत वाले ! तुम पर लाखों सलाम

तुम पर लाखों सलाम आक़ा, तुम पर लाखों सलाम आक़ा
तुम पर लाखों सलाम आक़ा, तुम पर लाखों सलाम आक़ा



शायर:
मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान क़ादरी नूरी

ना'त-ख़्वाँ:
क़ारी ख़लील अत्तारी
मौलाना बिलाल रज़ा क़ादरी
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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