तेरा खावाँ मैं तेरे गीत गावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
हलीमा घर कदी वेखे, कदी सरकार नूँ वेखे
मैं केह्ड़ी सेज तेरे लई सजावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा खावाँ मैं तेरे गीत गावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
मेरा दिल वी ये चाव्हँदा ए तुसी मेरे वी घर आओ
तेरी राहवाँ दे विच पलकाँ विछावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा खावाँ मैं तेरे गीत गावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
जगाओ भाग मेरे वी अबू अय्यूब दे वाँगूँ
मुक़द्दर उस दा मैं किथों लियावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा खावाँ मैं तेरे गीत गावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
मैं कुझ वी नईं जे तेरे नाल मेरी कोई निस्बत नईं
मैं सब कुझ हाँ जे मैं तेरा सदावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा खावाँ मैं तेरे गीत गावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
सुना है आप हर 'आशिक़ के घर तशरीफ़ लाते हैं
मेरे घर में भी हो जाए चराग़ाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा खावाँ मैं तेरे गीत गावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
मदीने पाक दे अंदर मेरी एहो 'इबादत ए
तेरे रौज़े तों ना नज़राँ हटावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा खावाँ मैं तेरे गीत गावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
कोई ता'रीफ़ होवे ओस सोहणे दी, ज़हूरी ! वी
क़लम जामी दा मैं किथों लियावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा खावाँ मैं तेरे गीत गावाँ, या रसूलल्लाह !
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावाँ, या रसूलल्लाह !
शायर:
मुहम्मद अली ज़हूरी
ना'त-ख़्वाँ:
ओवैस रज़ा क़ादरी
फ़रहान अली क़ादरी
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