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तेरा नाम ख़्वाजा मुईनुद्दीन | रसूल ए पाक की आल है

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तेरा नाम ख़्वाजा मुईनुद्दीन | रसूल ए पाक की आल है

तेरा नाम ख़्वाजा मुईनुद्दीन,

तु रसूल ए पाक की आल है,

तेरी शान ख़्वाजा ए ख़्वाजगां,

तुझे बेकसों का ख्याल है।


मेरा बिगड़ा वक्त संवार दो,

मेरे ख़्वाजा मुझको नवाज़ दो,

तेरी एक निगाह की बात है,


मेरी ज़िंदगी का सवाल है।

मैं गदाए ख़्वाजा ए चिश्त हूं,

मुझे इस गदाई पे नाज़ है,

मेरा नाज़ ख़्वाजा पे क्यों न हो,

मेरा ख़्वाजा बंदा नवाज़ है।

मेरा ख़्वाजा अता ए रसूल है,

वो बहार ए चिश्त का फूल है,

वो बहार ए गुलशने फातिमा,

चमने अली का निहाल है।

यहां भीख मिलती है बेगुमां,

ये बड़े सखी का है आस्तां,

यहां सबकी भरती है झोलियाँ,

ये दर ए गरीब नवाज़ है।

 

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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