भाषा:

खोजें

दुनिया का सब से बड़ा जश्न है | अस्सलामु 'अलैका या ! या रसूलल्लाह !

  • यह साझा करें:
दुनिया का सब से बड़ा जश्न है | अस्सलामु 'अलैका या ! या रसूलल्लाह !

अस्सलामु 'अलैका या ! या रसूलल्लाह !
अस्सलामु 'अलैका या हबीबी ! या नबियल्लाह !

सज गई है ये ज़मीं, सज गया है आसमाँ
मुस्तफ़ा के नूर से सज गया है कुल जहाँ

मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा सल्ले-'अला !

दुनिया का सब से बड़ा, सब से बड़ा जश्न है
मेरे सरकार के मीलाद का ये जश्न है

आक़ा का जश्न है, मौला का जश्न है
प्यारे का जश्न है, जश्न है

जब बारहवीं का चाँद ज़माने पे छा गया
बुत गिर गए ज़मीन पे, शैतान रो पड़ा
तारे भी झूम झूम के क़दमों में गिर गए
का'बा भी मुस्तफ़ा की सलामी को झुक गया

सज गई है ये ज़मीं, सज गया है आसमाँ
मुस्तफ़ा के नूर से सज गया है कुल जहाँ

मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा सल्ले-'अला !

दुनिया का सब से बड़ा, सब से बड़ा जश्न है
मेरे सरकार के मीलाद का ये जश्न है

मरहबा या मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !

सब से बड़ा है जश्न ख़ुदा के हबीब का
जिन के तुफ़ैल रब ने बनाए हैं दो-जहाँ
होते न मुस्तफ़ा तो न होती ये काइनात
ज़िंदा हैं हम जो आज, है सदक़ा रसूल का

सज गई है ये ज़मीं, सज गया है आसमाँ
मुस्तफ़ा के नूर से सज गया है कुल जहाँ

मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा सल्ले-'अला !

दुनिया का सब से बड़ा, सब से बड़ा जश्न है
मेरे सरकार के मीलाद का ये जश्न है

आक़ा का जश्न है, मौला का जश्न है
प्यारे का जश्न है, जश्न है

शान-ए-नबी का बयाँ, मक़्सद-ए-मीलाद है
आल-ए-नबी से वफ़ा, मक़्सद-ए-मीलाद है
ज़िक्र हो असहाब का, मक़्सद-ए-मीलाद है
ज़िंदगी में रौशनी, बरकत-ए-मीलाद है
'इल्म से ये दोस्ती, बरकत-ए-मीलाद है
ईमाँ में ताज़गी, बरकत-ए-मीलाद है
मुस्तफ़ा की गुफ़्तुगू, 'अज़मत-ए-मीलाद है
हो रही है चार-सू, 'अज़मत-ए-मीलाद है
'आशिक़ों के रू-ब-रू, 'अज़मत-ए-मीलाद है

आया है आज वो जिसे आदम करे सलाम
हर इक नबी का रब ने बनाया जिसे इमाम
'ईसा को भी है उम्मती होने की आरज़ू
यूसुफ़ भी जिस पे क़ुर्बां है, जिब्रील है ग़ुलाम

सज गई है ये ज़मीं, सज गया है आसमाँ
मुस्तफ़ा के नूर से सज गया है कुल जहाँ

मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा सल्ले-'अला !

दुनिया का सब से बड़ा, सब से बड़ा जश्न है
मेरे सरकार के मीलाद का ये जश्न है

त़ल'अल-बद्रु 'अलैना, मिन स़निय्यतिल-वदा'इ
वजब-श्शुक्रु 'अलैना, मा द'आ लिल्लाहि दा'ई

आए नबी तो बेटियाँ दबने से बच गईं
बेवाओं की भी डोलियाँ हैं फिर से सज गईं
माओं को ख़ुल्द, बेटी को रहमत बना दिया
दीवारें नफ़रतों की ज़मीं में हैं धँस गईं

सज गई है ये ज़मीं, सज गया है आसमाँ
मुस्तफ़ा के नूर से सज गया है कुल जहाँ

मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा सल्ले-'अला !

दुनिया का सब से बड़ा, सब से बड़ा जश्न है
मेरे सरकार के मीलाद का ये जश्न है

आक़ा का जश्न है, मौला का जश्न है
प्यारे का जश्न है, जश्न है

कर के चराग़ाँ सारा जहाँ जगमगा दिया
हर घर पे 'आशिक़ों ने है झंडा लगा दिया
लंगर कहीं है और कहीं शर्बत-ओ-सबील
'उश्शाक़-ए-मुस्तफ़ा कभी होते नहीं बख़ील

सज गई है ये ज़मीं, सज गया है आसमाँ
मुस्तफ़ा के नूर से सज गया है कुल जहाँ

मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा सल्ले-'अला !

दुनिया का सब से बड़ा, सब से बड़ा जश्न है
मेरे सरकार के मीलाद का ये जश्न है

नबियों के सुल्तान आए ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
दो-जहाँ की शान आए ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
साहिब-ए-क़ुरआन आए ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
'आशिक़ों की जान आए ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
सय्यिद-ओ-सरदार आए ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
ख़ल्क़ के सरकार आए ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
अहमद-ए-मुख़्तार आए ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
दिलबर-ओ-दिलदार आए ! मरहबा या मुस्तफ़ा !
मरहबा या मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !

अस्सलाम, ऐ जान-ए-'आलम !
अस्सलाम, ईमान-ए-'आलम !
शाह-ए-दीं ! सुल्तान-ए-'आलम !
मरहबा मुस्तफ़ा !

ये जश्न कोई आज की ईजाद तो नहीं
सदियों से हो रहा है, नई बात तो नहीं
आमद की अपनी याद नबी ने मनाई है
ख़ुद रब्ब-ए-काइनात ने महफ़िल सजाई है

सज गई है ये ज़मीं, सज गया है आसमाँ
मुस्तफ़ा के नूर से सज गया है कुल जहाँ

मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा सल्ले-'अला !

दुनिया का सब से बड़ा, सब से बड़ा जश्न है
मेरे सरकार के मीलाद का ये जश्न है

मरहबा या मुस्तफ़ा ! मरहबा या मुस्तफ़ा !

रब ने रसूल-ए-पाक को बख़्शा है वो मक़ाम
इंसान क्या चरिंद भी करते हैं एहतिराम
सूरज फिरे तो चाँद इशारे से चाक हो
बादल करे है साया, शजर भी करें सलाम

सज गई है ये ज़मीं, सज गया है आसमाँ
मुस्तफ़ा के नूर से सज गया है कुल जहाँ

मरहबा ! मरहबा ! मरहबा या मुस्तफ़ा सल्ले-'अला !

दुनिया का सब से बड़ा, सब से बड़ा जश्न है
मेरे सरकार के मीलाद का ये जश्न है

आक़ा का जश्न है, मौला का जश्न है
प्यारे का जश्न है, जश्न है

नामूस-ए-मुस्तफ़ा के मुहाफ़िज़ पे हो सलाम
अहमद रज़ा पे, ख़ादिम-ए-रज़वी पे हो सलाम
नामूस पर हो पहरा, है 'आसिम ! मिशन यही
है जान भी हमारी रसूल-ए-ख़ुदा के नाम

लब्बैक ! लब्बैक ! लब्बैक या रसूलल्लाह !
लब्बैक ! लब्बैक ! लब्बैक या रसूलल्लाह !

ये दिल भी तुम्हारा है ! लब्बैक या रसूलल्लाह !
ये जाँ भी तुम्हारी है ! लब्बैक या रसूलल्लाह !
हम 'इश्क़ के ग़ाज़ी हैं ! लब्बैक या रसूलल्लाह !
हम तेरे सिपाही हैं ! लब्बैक या रसूलल्लाह !
सौदा नहीं करेंगे ! लब्बैक या रसूलल्लाह !
ईमान न बेचेंगे ! लब्बैक या रसूलल्लाह !
सब कुछ ही तुम्हारा है ! लब्बैक या रसूलल्लाह !
सब कुछ ही लुटाएँगे ! लब्बैक या रसूलल्लाह !
लब्बैक या रसूलल्लाह ! लब्बैक या रसूलल्लाह !


शायर:

मुहम्मद आसिम-उल-क़ादरी मुरादाबादी

ना'त-ख़्वाँ:

हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी
हाफ़िज़ अहसन क़ादरी

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

एक टिप्पणी छोड़ें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड * से चिह्नित हैं

Your experience on this site will be improved by allowing cookies Cookie Policy