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ठंडी ठंडी हवा रहमतों की चली

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ठंडी ठंडी हवा रहमतों की चली

ठंडी ठंडी हवा रहमतों की चली
बनके मौजे करम मुस्तफा आ गए
हल मेरी हो गयीं खुद ब खुद मुश्किलें
सारे आलम के मुश्किल कुशा आ गए
आ गए आ गए मुस्तफा आ गए

आमेना का मुक़द्दर संवारा गया
गोद में चाँद जिनकी उतारा गया
हूरो गिलमा सलामी को झुकने लगे
पड़ते रिज़वान सल्ले अला आ गए
आ गए आ गए मुस्तफा आ गए

दोनों आलम की क़िस्मत बदलने लगी
नूर में सारी कौनैन ढलने लगी
खुश मुक़द्दर हलीमा मुबारक तुजे
गोद में तेरी खैरुल वरा आ गए
आ गए आ गए मुस्तफा आ गए

बन गयी है ज़मीन रश्के बागे जीना
सज गए आसमान, खिल उठा गुलसितां
मांगलो रेहमतें, खोल लो जोलियाँ
देने खैरात हाजत रवा आ गए
आ गए आ गए मुस्तफा आ गए

आज कोई भी साईम न खाली रहे
सब मुरादें मिलें, हर मुसीबत टले
मदनी आक़ा की आमद का सदक़ा मिले
भीख लेने को हम या खुदा आ गए
आ गए आ गए मुस्तफा आ गए

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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