दर-ए-अक़्दस पे हाल-ए-दिल सुनाना याद आता है
मदीना याद आता है
मदीने में जो गुज़रा वो ज़माना याद आता है
मदीना याद आता है
ख़ुदा के नूर के जल्वे जो देखे मैं ने तयबा में
मुझे रह रह के वो मंज़र सुहाना याद आता है
मदीना याद आता है
अदब से बैठ कर उस गुंबद-ए-ख़ज़रा के साए में
नबी की याद में आँसू बहाना याद आता है
मदीना याद आता है
रसूलुल्लाह के दरबार में, उन की मोहब्बत में
वो मेरा रोज़-ओ-शब का आना-जाना याद आता है
मदीना याद आता है
ओवैस-ए-कर्न बोले, माँ ! इजाज़त दीजिए मुझ को
जुदाई में तड़पता हूँ, मदीना याद आता है
मदीना याद आता है
मज़ार-ए-फ़ातिमा पे कर्बला वालों की याद आई
मदीने वाले आक़ा का घराना याद आता है
मदीना याद आता है
नबी के ज़िक्र की महफ़िल में आते ही मुझे, मोहसिन !
मदीना याद आता था, मदीना याद आता है
मदीना याद आता है
ना'त-ख़्वाँ:
यूसुफ़ मेमन
शहबाज़ क़मर फ़रीदी
मुहम्मद आज़म क़ादरी
फ़रहान अली क़ादरी
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