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धूम हर जानिब मची है आप के मीलाद की

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धूम हर जानिब मची है आप के मीलाद की

धूम हर जानिब मची है आप के मीलाद की
हर मुसलमाँ को ख़ुशी है आप के मीलाद की

जिन के 'अमलों में है सब कुछ, पर नहीं चेहरे पे नूर
उन के दामन में कमी है आप के मीलाद की

बेशुमार उस पर बरसती हैं ख़ुदा की रहमतें
बज़्म जिस घर में सजी है आप के मीलाद की

ना हमें जन्नत का लालच, ना कोई दोज़ख़ का ख़ौफ़
क्यूँ कि निस्बत मिल गई है आप के मीलाद की

जिस के सदक़े में मिला है सारी दुनिया को वुजूद
क्या ही पुर-'अज़मत घड़ी है आप के मीलाद की

नूर को, आक़ा ! मिले दीदार की ख़ैरात अब
चाकरी जो इस ने की है आप के मीलाद की


शायर:
नूर अहमद नूर

ना'त-ख़्वाँ:
मीलाद रज़ा क़ादरी

 

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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