धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
मची है धूम, पयम्बर की आमद आमद है
हबीब-ए-रब्ब-ए-अकबर की आमद आमद है
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
ये किस शहंशाह-ए-वाला की आमद आमद है
ये कौन से शह-ए-बाला की आमद आमद है
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
ये आज तारे ज़मीं की तरफ़ हैं क्यूँ माइल
ये आसमान से पैहम है नूर क्यूँ नाज़िल
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
फ़रिश्ते आज जो धूमें मचाने आए हैं
इन्हीं के आने की शादी रचाने आए हैं
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
रुसुल इन्हीं का तो मुज़्दा सुनाने आए हैं
इन्हीं के आने की ख़ुशियाँ मनाने आए हैं
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
यही तो सोते हुओं को जगाने आए हैं
यही तो रोते हुओं को हसाने आए हैं
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
इन्हें ख़ुदा ने किया अपने मुल्क का मालिक
इन्हीं के क़ब्ज़े में रब के ख़ज़ाने आए हैं
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
जो चाहेंगे, जिसे चाहेंगे ये उसे दें गे
करीम हैं ये ख़ज़ाने लुटाने आए हैं
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
रउफ़ ऐसे हैं और ये रहीम हैं इतने
कि गिरते पड़तों को सीने लगाने आए हैं
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
सुनोगे 'ला' न ज़बान-ए-करीम से, नूरी !
ये फ़ैज़-ओ-जूद के दरिया बहाने आए हैं
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
धूम मचा दो आमद की, आ गए सरकार
शायर:
मुस्तफ़ा रज़ा ख़ान बरेलवी
ना'त-ख़्वाँ:
हाफ़िज़ ताहिर क़ादरी
मुहम्मद फ़रहान अली क़ादरी
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