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उनकी चौखट हो तो कासा भी पड़ा सजता है

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उनकी चौखट हो तो कासा भी पड़ा सजता है
उनकी चौखट हो तो कासा भी पड़ा सजता है
दर बड़ा हो तो सवाली भी खड़ा सजता है

उनकी चौखट हो तो कासा भी पड़ा सजता है

सरवरे दीं के मुसल्ले पे खुदा जानता है
आगे असहाब के सिद्दीक़ खड़ा सजता है

उनकी चौखट हो तो कासा भी पड़ा सजता है

ये गुलामी कहीं कमतर नहीं होने देती
उनका नौकर हो तो शाहों में खड़ा सजता है

उनकी चौखट हो तो कासा भी पड़ा सजता है

मुझको कहते हैं ये सब अहले महोब्बत सरवर
नात का नगमा तेरे लब पे बड़ा सजता है

उनकी चौखट हो तो कासा भी पड़ा सजता है
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