उनकी लगन दिल में बसाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
एक दिन चलेगी गुलामों की डोली
सल्ले-'अला सल्ले-'अला की होगी बोली
नात-ए-नबी हम गुनगुनाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
उनकी लगन दिल में बसाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
आक़ा के शहर में , खजूरों के छांव में
दिल-कश हवाओं में, मुअत्तर फ़िज़ाओं में
छोटा सा एक घर बनाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
उनकी लगन दिल में बसाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
खुशियों की जाह है, कोई ग़म नहीं है
तैबा नगर खुल्द से काम नहीं है
ज़मज़म से हम फैज़ पाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
उनकी लगन दिल में बसाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
तैबा नगर के काश हम हों कबूतर
मीनारों-गुम्बद के साये में अक्सर
रोज़े का फेरा लगाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
उनकी लगन दिल में बसाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
परवाज़ को पाल पर दे दे या रब्ब !
नात लिखने का हुनर दे दे या रब्ब !
आक़ा को जा कर सुनाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
उनकी लगन दिल में बसाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
एक रोज़ ढूंढेगी रहमत बहाना
अपना भी बदलेगा एक दिन बहाना
दिल की लगी दर पर बजाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
उनकी लगन दिल में बसाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
एक दिन चलेगी गुलामों की डोली
सल्ले-'अला सल्ले-'अला की होगी बोली
नात-ए-नबी हम गुनगुनाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
उनकी लगन दिल में बसाएंगे
नबी नबी कहते मदीने चले जाएंगे
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