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वाह क्या मर्तबा अये गौस है बाला तेरा || चलो बग़दाद चलो गौसे पाक के रोज़े

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वाह क्या मर्तबा अये गौस है बाला तेरा || चलो बग़दाद चलो गौसे पाक के रोज़े
 
चलो बग़दाद चलो गौस-ए-पाक के रोज़े
बड़े हज़रत की बारगाह चलो
नूर-ए-कौसर के साथ मिल के चलो
 
वाह ! क्या मर्तबा अये गौस ! है बाला तेरा
ऊँचे ऊँचों के सरों से क़दम आला तेरा
 
चलो बग़दाद चलो गौस-ए-पाक के रोज़े
 
सर भला क्या कोई जाने के है कैसा तेरा
औलिया मलते हैं आँखें वो है तलवा तेरा
 
चलो बग़दाद चलो गौस-ए-पाक के रोज़े
 
क्या दबे जिसपे हिमायत का हो पंजा तेरा
शेर को खतरे में लाता नहीं कुत्ता तेरा
 
चलो बग़दाद चलो गौस-ए-पाक के रोज़े
 
कसमें दे-दे के खिलाता है पिलाता है तुजे
प्यारा अल्लाह तेरा चाहने वाला तेरा
 
चलो बग़दाद चलो गौस-ए-पाक के रोज़े
 
मुस्तफा के तने बे-साया का साया देखा
जिसने देखा मेरी जां ! जलवा-ए-जैबा तेरा 
 
चलो बग़दाद चलो गौस-ए-पाक के रोज़े
 
इब्ने ज़हरा को मुबारक हो 'अरूस-ए-क़ुदरत
क़ादरी पाए तसद्दुक़ मेरे दूल्हा तेरा
 
चलो बग़दाद चलो गौस-ए-पाक के रोज़े
 
क्यों न क़ासिम हो के तू इब्ने अबिल क़ासिम हो
क्यों न क़ादिर हो के मुख्तार है बाबा तेरा
 
चलो बग़दाद चलो गौस-ए-पाक के रोज़े
 
नबवी मी , अलवी फ़स्ल , बतुली गुलशन
हसनी फूल , हुसैनी है महकना तेरा
 
चलो बग़दाद चलो गौस-ए-पाक के रोज़े
 
नबवी दिल , अलवी बुर्ज , बतुली बदन
हसनी चाँद , हुसैनी है उजाला तेरा
 
चलो बग़दाद चलो गौस-ए-पाक के रोज़े
 
मुझको रुस्वा भी अगर कोई कहेगा तो यूँहीं
के वही नाम रज़ा बंदा-ए-रुस्वा तेरा
 
चलो बग़दाद चलो गौस-ए-पाक के रोज़े
 
फखर-ए-आक़ा में रज़ा और भी एक नज़्म-ए-रफ़ीक़
चल लिखा लाएं सना-ख्वानों में चहेरा तेरा
 
चलो बग़दाद चलो गौस-ए-पाक के रोज़े
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Mohammad Wasim

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