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Waqt Sehri Ka Ho Gaya Jaago

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Waqt Sehri Ka Ho Gaya Jaago

वक़्त सहरी का हो गया जागो
नूर हर सिम्त छा गया जागो 
 
उठो सहरी की करलो तैयारी
रोज़ा रखना है आज का जागो 
 
माह-ए-रमज़ान फ़र्ज़ हैं रोज़े 
एक भी तुम न छोड़ना जागो 
 
उठो-उठो वुज़ू भी कर लो और
तुम तहज्जुद करो 'अदा जागो 
 
चाय गरमा-गरम पियो उठ कर
खालो हलकी सी कुछ ग़िज़ा जागो 
 
होगी मक़बूल फ़ज़्ल-ए-मौला से 
खाके सहरी करो दुआ जागो 
 
माह-ए-रमज़ान की बरकतें लूटो
लूट लो रहमत-ए-ख़ुदा जागो 
 
सहरी खा कर के तुम 'अदा करलो 
सुन्नत-ए-शाह-ए-अम्बिया जागो 
 
तुमको मौला मदीना दिखलाए
और हज भी करो 'अदा जागो 
 
माह-ए-रमज़ान के सदक़े में 
दे ख़ुदा 'इश्क़-ए-मुस्तफा जागो 
 
सहर-ओ-इफ्तार का मदीने में
दे शराफ तुमको किब्रिया जागो 
 
रहमतों की जड़ी बरसती है
जल्द उठ कर के लो नहा जागो 
 
तुमको दीदार-ए-मुस्तफा हो जाए
है ये 'अत्तार की दुआ जागो 
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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