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वा तू इज्जु मंतशा वातु जिल्लू मंतशा

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वा तू इज्जु मंतशा वातु जिल्लू मंतशा

नादान को इस बात का बिल्कुल नहीं पता
अल्लाह के हुज़ूर ये होता है फ़ैसला

झूठी नवाज़िशात की बारिश फ़िज़ूल है
मुझको ज़लील करने की साज़िश फ़िज़ूल है

मेरा क़दम क़दम पे मददगार है ख़ुदा
वतो-इज़्ज़ो-मनतशा वतो-ज़िल्लो-मनतशा

नादान को इस बात का बिल्कुल नहीं पता
वतो-इज़्ज़ो-मनतशा वतो-ज़िल्लो-मनतशा

 

जब तक ज़मीन वालों को नीचा दिखाओगे
बे-दाग़ सूरतों को तो शीशा दिखाओगे

आयेगी आस्मान से उस वक़्त ये सदा
वतो-इज़्ज़ो-मनतशा वतो-ज़िल्लो-मनतशा

नादान को इस बात का बिल्कुल नहीं पता
वतो-इज़्ज़ो-मनतशा वतो-ज़िल्लो-मनतशा

 

बन्जर ज़मीन पे फूलों की चादर बिछाये वो
पत्थर को मोम, मोम को पत्थर बनाये वो

 

उसकी रज़ा से ज़हर भी बन जाता है दवा
वतो-इज़्ज़ो-मनतशा वतो-ज़िल्लो-मनतशा

 

नादान को इस बात का बिल्कुल नहीं पता
वतो-इज़्ज़ो-मनतशा वतो-ज़िल्लो-मनतशा

 

कुछ भी नहीं हूँ दोस्तों अनपढ़ गवार हूँ
बे-नाम, बे-निशान हूँ, बे-ऐतबार हूँ

 

अल्ताफ़ था तो उसने बनाया मुझे ज़िया
वतो-इज़्ज़ो-मनतशा वतो-ज़िल्लो-मनतशा

अनस था मैं तो! उसने बनाया नात खां
वतो-इज़्ज़ो-मनतशा वतो-ज़िल्लो-मनतशा

नादान को इस बात का बिल्कुल नहीं पता
अल्लाह के हुज़ूर में होता है फ़ैसला 

वतो-इज़्ज़ो-मनतशा वतो-ज़िल्लो-मनतशा
वतो-इज़्ज़ो-मनतशा वतो-ज़िल्लो-मनतशा

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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