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वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी

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वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी

वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी

या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह

वहाँ की फकीरी है , रश्के अमीरी
वहाँ पर बसर हो , मेरी ज़िंदगानी
अये अल्लाह ! मेरे मुक़द्दर में लिख दे
वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी

वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
 
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह

वहाँ चारसू रहमतों के उजाले
वहाँ जाके आते हैं तक़दीर वाले
वहाँ का सवेरा करम की ज़मानत
वहाँ एक पल में बदलती है क़िस्मत
वहाँ हर तरफ जन्नतों के मनाज़िर
वहाँ की हर एक शब् सुहानी सुहानी
 
वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
 
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह

वहाँ आज तक हैं फरिश्तों के फेरे
जहां चलते फिरते थे सरकार मेरे
जहां हम को क़ुरआन का तोहफा मिला है
जहां बाबे रेहमत हमेशा खुला है
वहीँ मेरी क़िस्मत का चमकेगा तारा
वहीँ पर मिटेगी मेरी ना-तवानी

वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
 
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह

वो गलियां महबूबे दावर गलियां
वो गलियां साक़ी-इ-क़ौसर की गलियां
वो गलियां जहाँ नूर ही नूर हर सू
अभी तक है जिनमें मुहम्मद की खुश्बू
अभी तक करम की गटाओं के मंज़र
अभी तक वही रुत है सदियों पुरानी

वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
 
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह

जो ज़ालिम थे हर ज़ुल्म उनसे छुड़ाया
के आदम के बेटों को जीना सिखाया
वो मोहताज जिनके नहीं थे ठिकाने
गले से लगाया मेरे मुस्तफा ने
जहाँ पर गरीबों को इज़्ज़त मिली है
यतीमों ने पायी वहाँ शादमानी

वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
 
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह

वहीँ से मिली हमको इमां की दौलत
वहीँ से दो आलम पे बरसी है रेहमत
वो ऐसा नगर जिसपे जन्नत निछावर
उसी सरज़मीं पर है अल्लाह का घर
वो ऐसी ज़मीं आसमां जिसको चूमे
जहाँ सो रहा है दो आलम का वाली

वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
 
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह

खुदावन्दा मुझपर ये अहसान कर दे
कभी मुझको काबे का मेहमान कर दे
दरे मुस्तफा पर में पलकें बिछाऊं
कभी भी वहाँ से में वापस न आऊं
इसी धुन में इक़बाल आये बुढ़ापा
इसी आरज़ू में कटी है जवानी
 
वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
वो तयबह की गलियां वो ज़मज़म का पानी
 
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह
या अल्लाह अल्लाह अल्लाह या अल्लाह
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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