आ गए सरकार ! झूमो !
नबियों के सरदार ! झूमो !
दो जग के मुख़्तार ! झूमो !
हैं सब के ग़म-ख़्वार ! झूमो !
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
आ'ला की आमद ! मरहबा !
बाला की आमद ! मरहबा !
औला की आमद ! मरहबा !
वाला की आमद ! मरहबा !
रसूल की आमद ! मरहबा !
मक़्बूल की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
पुर-नूर की आमद ! मरहबा !
बशीर की आमद ! मरहबा !
नज़ीर की आमद ! मरहबा !
अव्वल की आमद ! मरहबा !
आख़िर की आमद ! मरहबा !
बातिन की आमद ! मरहबा !
ज़ाहिर की आमद ! मरहबा !
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
ये जश्न-ए-हबीब-ए-ख़ुदा हो रहा है
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
ये क्यूँ आज होता है घर-घर चराग़ाँ
जहाँ का समाँ क्यूँ नया हो रहा है
ये जश्न-ए-हबीब-ए-ख़ुदा हो रहा है
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
ज़माने पे क्यूँ आज है नूर छाया
ये क्यूँ ज़िक्र-ए-सल्ले-'अला हो रहा है
ये जश्न-ए-हबीब-ए-ख़ुदा हो रहा है
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
क्यूँ जिब्रील झंडा लिये आ रहे हैं
सर-ए-का'बा ये आज क्या हो रहा है
ये जश्न-ए-हबीब-ए-ख़ुदा हो रहा है
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
आ गए सरकार ! झूमो !
नबियों के सरदार ! झूमो !
दो जग के मुख़्तार ! झूमो !
हैं सब के ग़म-ख़्वार ! झूमो !
सर-ए-का'बा गाड़े हैं जिब्रील झंडा
'अलम तेरा दुनिया पे वा हो रहा है
ये जश्न-ए-हबीब-ए-ख़ुदा हो रहा है
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
आ'ला की आमद ! मरहबा !
बाला की आमद ! मरहबा !
औला की आमद ! मरहबा !
वाला की आमद ! मरहबा !
रसूल की आमद ! मरहबा !
मक़्बूल की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
पुर-नूर की आमद ! मरहबा !
बशीर की आमद ! मरहबा !
नज़ीर की आमद ! मरहबा !
अव्वल की आमद ! मरहबा !
आख़िर की आमद ! मरहबा !
बातिन की आमद ! मरहबा !
ज़ाहिर की आमद ! मरहबा !
हो बख़्शिश मेरी सारी उम्मत की, या रब !
ज़बाँ से ये उन की अदा हो रहा है
रब्बी हब ली उम्मती कहते हुए पैदा हुए
हक़ ने फ़रमाया कि बख़्शा, अस्सलातु व-स्सलाम
हो बख़्शिश मेरी सारी उम्मत की, या रब !
ज़बाँ से ये उन की अदा हो रहा है
ये जश्न-ए-हबीब-ए-ख़ुदा हो रहा है
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
आ गए सरकार ! झूमो !
नबियों के सरदार ! झूमो !
दो जग के मुख़्तार ! झूमो !
हैं सब के ग़म-ख़्वार ! झूमो !
न क्यूँ आज झूमें कि सरकार आए
ख़ुदा की ख़ुदाई के मुख़्तार आए
मुबारक तुम्हें, ग़म के मारो ! मुबारक
मदावा-ए-ग़म बन के ग़म-ख़्वार आए
सुवाल अपनी उम्मत की बख़्शिश का करते
वो हम 'आसियों के तरफ़-दार आए
यतीमों के वाली, ग़रीबों के हामी
वो आफ़त-ज़दों के मददगार आए
विलादत का सदक़ा, गुनाहों से नफ़रत
हो, अच्छाइयों पर मुझे प्यार आए
विलादत का सदक़ा हमें अपना ग़म दो
शहा ! चश्म-ए-नम के तलबगार आए
विलादत का सदक़ा, पड़ोसी बनाना
शहा ! ख़ुल्द में जब ये बद-कार आए
विलादत का सदक़ा, शहा ! ज़िंदगी भर
मदीने में हर साल 'अत्तार आए
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
आ'ला की आमद ! मरहबा !
बाला की आमद ! मरहबा !
औला की आमद ! मरहबा !
वाला की आमद ! मरहबा !
रसूल की आमद ! मरहबा !
मक़्बूल की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
पुर-नूर की आमद ! मरहबा !
बशीर की आमद ! मरहबा !
नज़ीर की आमद ! मरहबा !
अव्वल की आमद ! मरहबा !
आख़िर की आमद ! मरहबा !
बातिन की आमद ! मरहबा !
ज़ाहिर की आमद ! मरहबा !
ये नूरानी सूरत दुह़ाहा के जल्वे
तो वल्लैल गेसू नुमा हो रहा है
है होंटों पे क़ुर्बान रा'नाई-ए-गुल
तबस्सुम पे बुलबुल फ़िदा हो रहा है
ये जश्न-ए-हबीब-ए-ख़ुदा हो रहा है
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
ये कहती थी घर घर में जा कर हलीमा
मेरे घर में ख़ैर-उल-वरा आ गए हैं
बड़े औज पर है मेरा अब मुक़द्दर
मेरे घर हबीब-ए-ख़ुदा आ गए हैं
उठी चार-सू रहमतों की घटाएँ
मु'अत्तर मु'अत्तर हैं सारी फ़ज़ाएँ
ख़ुशी में ये जिब्रील नग़्मे सुनाएँ
वो शाफ़े'-ए-रोज़-ए-जज़ा आ गए हैं
ये ज़ुल्मत से कह दो कि डेरे उठा ले
कि हैं हर तरफ़ अब उजाले उजाले
कहा जिन को हक़ ने सिराज-म्मुनीरा
मेरे घर वो नूर-ए-ख़ुदा आ गए हैं
ये सुन कर सख़ी आप का आस्ताना
है दामन पसारे हुए सब ज़माना
विलादत का सदक़ा, निगाह-ए-करम हो
तेरे दर पे तेरे गदा आ गए हैं
ये जश्न-ए-हबीब-ए-ख़ुदा हो रहा है
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
ज़माने के ग़म भूल जाते हैं उस को
तेरे दर जो हाज़िर गदा हो रहा है
गुमा दे तू फ़ानी को अपनी विला में
ये दुनिया के ग़म में फ़ना हो रहा है
ये जश्न-ए-हबीब-ए-ख़ुदा हो रहा है
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
आ'ला की आमद ! मरहबा !
बाला की आमद ! मरहबा !
औला की आमद ! मरहबा !
वाला की आमद ! मरहबा !
रसूल की आमद ! मरहबा !
मक़्बूल की आमद ! मरहबा !
हुज़ूर की आमद ! मरहबा !
पुर-नूर की आमद ! मरहबा !
बशीर की आमद ! मरहबा !
नज़ीर की आमद ! मरहबा !
अव्वल की आमद ! मरहबा !
आख़िर की आमद ! मरहबा !
बातिन की आमद ! मरहबा !
ज़ाहिर की आमद ! मरहबा !
आ गए सरकार ! झूमो !
नबियों के सरदार ! झूमो !
दो जग के मुख़्तार ! झूमो !
हैं सब के ग़म-ख़्वार ! झूमो !
ये जश्न-ए-हबीब-ए-ख़ुदा हो रहा है
ये मीलाद-ए-ख़ैर-उल-वरा हो रहा है
शायर:
अश्फ़ाक़ अत्तारी
ना'त-ख़्वाँ:
अश्फ़ाक़ अत्तारी
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