आज इकट्ठा हैं दानिश-वरान-ए-वतन
या'नी 'उल्मा-ओ-शो'अरा-ए-फ़िक्र और फ़न
साहिबान-ए-सुख़न, हासिल-ए-अंजुमन
नुक्ता-दान-ओ-फ़सीहान-ए-अहल-ए-सुनन
हैं अदीब-ओ-ख़तीब-ए-ज़ुबान-ओ-सुख़न
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
'अज़मत-ए-सिद्क़-ए-सिद्दीक़-ए-अकबर लिए
'अद्ल-ए-फ़ारूक़-ए-आ'ज़म का मज़हर लिए
सब्र-ए-'उस्माँ ग़नी का समंदर लिए
परतव-ए-दस्त-ओ-बाज़ू-ए-हैदर लिए
निकहत-ए-रंग-ए-हज़रत-हुसैन-ओ-हसन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
इस में अजमेरी ख़्वाजा की है ख़्वाजगी
सय्यद मस'ऊद ग़ाज़ी का गुलशन यही
ये है फुलवारी अशरफ़ जहाँगीर की
रंग-ओ-बू-ए-बरेली-ओ-मारहरवी
इस पे साया-फ़िगन पंजा-ए-पंजतन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
इस में हाजी 'अली, इस में हाजी मलंग
सारे दरिया, समंदर, पहाड़ इस के संग
शाह मीना की सहबा का जोश-ओ-उमंग
वारिस-ए-पाक का ज़ा'फ़राँ-ज़ार रंग
गुल-ब-दामाँ, गुल-अफ़रोज़, गुल पैरहन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
फ़ज़्ल-ए-हक़ ख़ैराबादी का इस में उसूल
इस के हामी बदायूँ के फ़ज़्ल-ए-रसूल
शाह मारहरवी सय्यद आल-ए-रसूल
कर लिया पीर ने भी रज़ा को क़ुबूल
इस लिए उस पे नाज़ाँ हैं अहल-ए-सुनन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
इस में 'इल्म-ए-'अलीमी-न'ईमी सिफ़ात
मेहर-ओ-माह-ए-शरी'अत के दिन और रात
हामीदी, अमजदी, मुस्तफ़ाई हयात
इस में सिमटी हुई बेकराँ काइनात
इस में दश्त-ओ-जबल, बहर-ओ-बर, बाग़-ओ-बन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
मुस्तफ़ा के रज़ा की बहारें लिए
लाला-ओ-गुल महकते लहकते हुए
जगमगाते चराग़ाँ पे नूरी दिए
नूर ही नूर है जिस तरफ़ देखिए
नूर की शम'अ है, नूर की अंजुमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
इस में सय्यद मुहम्मद किछौछा की शान
मुफ़्ती अब्दुल हफ़ीज़ आगरा की है आन
इस में हाफ़िज़-ए-मिल्लत के मिस्बाहियान
और मुजाहिद-ए-मिल्लत हबीबुर्रहमान
सादगी जिस पे क़ुर्बान हर बाँकपन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
देखो अहमद रज़ा ख़ाँ के नेज़े की मार
पड़ गया जिस से आ'दा के सीने में ग़ार
हश्मती शेर-ए-बेशा-ए-सुन्नत का वार
बच के जाने न पाए वहाबी शिकार
ज़र्ब-ए-सदरूश्शरी'आ है बातिल-शिकन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
इस के रैहाँ की, अजमल ! महक चार-सू
इस के अख़्तर की अज़हर-मिनश्शम्स ख़ू
या इलाही ! सलामत रहे मू-ब-मू
मुफ़्ती-ए-आ'ज़म-ए-हिन्द की आबरू
हैं दु'आओं में मसरूफ़ अहल-ए-सुनन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
ये रज़ा का चमन है रज़ा का चमन
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