मरहबा मरहबा ! मरहबा या नबी ! या नबी ! या नबी !
या रसूल-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा !
या रसूल-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा !
जब कि पैदा हुए थे हमारे नबी
भोले-भाले नबी, प्यारे प्यारे नबी
दोनों 'आलम की आँखों के तारे नबी
अपने नाज़ुक लबों से पुकारें नबी
उम्मती उम्मती
या रसूल-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा !
या रसूल-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा !
सरकार की आमद ! मरहबा !
दिलदार की आमद ! मरहबा !
आक़ा की आमद ! मरहबा !
दाता की आमद ! मरहबा !
मरहबा मरहबा !
या रसूल-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा !
या रसूल-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा !
निसार तेरी चहल-पहल पर हज़ारों 'ईदें रबी-'उल-अव्वल
सिवाए इब्लिस के जहाँ में सभी तो ख़ुशियाँ मना रहे हैं
ज़माने भर में ये क़ा'इदा है कि जिस का खाना उसी का गाना
तो ने'मतें जिन की खा रहे हैं, उन्हीं के हम गीत गा रहे हैं
रूह-ए-कौन-ओ-मकाँ पर निखार आ गया
रूह-ए-इंसानियत को क़रार आ गया
मरहबा मरहबा हर किसी ने कहा
आमद-ए-मुस्तफ़ा
या रसूल-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा !
या रसूल-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा !
रात जो गुज़री नबी के ज़िक्र में
दिन से अच्छी ये हमारी रात है
हर तरफ़ अनवार की बरसात है
आमद-ए-सरकार की क्या बात है
हज़रत-ए-आमिना के दुलारे नबी
ग़म-ज़दा उम्मतों के सहारे नबी
रोज़-ए-महशर कहेगी ये ख़ल्क़-ए-ख़ुदा
सब के मुश्किल-कुशा
या रसूल-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा !
या रसूल-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा !
पुर-नूर है ज़माना सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
पर्दा उठा है किस का सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
आई नई हुकूमत, सिक्का नया चलेगा
'आलम ने रंग बदला सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
प्यारे रबी'-उल-अव्वल ! तेरी झलक के सदक़े
चमका दिया नसीबा सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
या रसूल-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा !
या रसूल-ए-ख़ुदा ! मरहबा मरहबा !
ना'त-ख़्वाँ:
मुईन क़ादरी बैंगलोर
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