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याद आयी हैं अपनी खताएं, जब खुदा का ख़याल आ गया है

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याद आयी हैं अपनी खताएं, जब खुदा का ख़याल आ गया है

याद आयी हैं अपनी खताएं, जब खुदा का ख़याल आ गया है
मेर बेचैन दिल को वहीँ पर, मुस्तफा का ख़याल आ गया है
 
यूँ तो मरियम भी है, हाजरा भी, नेक खातून है आसिया भी
बात जब आ गयी है हया की, फातिमा का ख़याल आ गया है
 
मेर बेचैन दिल को वहीँ पर, मुस्तफा का ख़याल आ गया है
 
याद आयी हैं अपनी खताएं, जब खुदा का ख़याल आ गया है
मेर बेचैन दिल को वहीँ पर, मुस्तफा का ख़याल आ गया है
 
ज़ुल्म का जब्र का सिलसिला था, एक तरफ सब्र का सिलसिला था
बात जब हक़्क़ो-बातिल की आयी, कर्बला का ख़याल आ गया है
 
मेर बेचैन दिल को वहीँ पर, मुस्तफा का ख़याल आ गया है
 
याद आयी हैं अपनी खताएं, जब खुदा का ख़याल आ गया है
मेर बेचैन दिल को वहीँ पर, मुस्तफा का ख़याल आ गया है
 
आयतें आयतों से मिला कर, उनकी यकजा सना कर रहा हूँ
बात रुखसार की आ गयी है, "वद्दुहा" का ख़याल आ गया है
 
मेर बेचैन दिल को वहीँ पर, मुस्तफा का ख़याल आ गया है
 
याद आयी हैं अपनी खताएं, जब खुदा का ख़याल आ गया है
मेर बेचैन दिल को वहीँ पर, मुस्तफा का ख़याल आ गया है
 
वो जो हैं मेरे शाफी-ए-महेशर, वो जो रोते थे उम्मत की खातिर
वो लम्बी दुआ मांगते थे, उस दुआ का ख़याल आ गया है
 
मेर बेचैन दिल को वहीँ पर, मुस्तफा का ख़याल आ गया है
 
याद आयी हैं अपनी खताएं, जब खुदा का ख़याल आ गया है
मेर बेचैन दिल को वहीँ पर, मुस्तफा का ख़याल आ गया है
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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