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ये कौन बनके सांसों की जनकार आये हैं

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ये कौन बनके सांसों की जनकार आये हैं

ये कौन बनके सांसों की जनकार आये हैं 
हर दिल का तार कहता है सरकार आये हैं
 
हम  बिकने इस लिए सरे बाजार आये हैं
महबूब-ए-खुदा बनके खरीदार आये हैं 
 
ये कौन बनके सांसों की जनकार आये हैं 
 
महशर में नजदी और वह्हाबी को देख कर 
दोज़ख कहेगी देखो ये गद्दार आये हैं
 
ये कौन बनके सांसों की जनकार आये हैं 
 
जन्नत पुकार उठेगी सुन्नी को देख कर
देखो ये मुस्तफा के वफादार आये हैं
 
ये कौन बनके सांसों की जनकार आये हैं 
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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