ज़बां से क्या में कहूं, आप से छुपा क्या है
वो जानते हैं मेरे दिल का माजरा क्या है
नबी के इश्क़ की लज़्ज़त बिलाल से पूछो
बिलाल जानते हैं इश्क़-ए-मुस्तफा क्या है
वो जानते हैं मेरे दिल का माजरा क्या है
ज़बां से क्या में कहूं ...
कहा खुदा ने सर-ए-हश्र बख्श दी उम्मत
मेरे हबीब बता और चाहता क्या है
वो जानते हैं मेरे दिल का माजरा क्या है
ज़बां से क्या में कहूं ...
गले में देखा जो पट्टा तेरी गुलामी का
कहा लकीरों ने अब इस से पूछना क्या है
वो जानते हैं मेरे दिल का माजरा क्या है
ज़बां से क्या में कहूं ...
मेरे हुज़ूर को खुद जैसा बिलने वाले
तुम उनकी ज़ात के बारे में जनता क्या है
वो जानते हैं मेरे दिल का माजरा क्या है
ज़बां से क्या में कहूं ...
सुनाके नेज़े पे क़ुरआन अली के बेटे ने
बता दिया है फनाह क्या है, और बक़ा क्या है
वो जानते हैं मेरे दिल का माजरा क्या है
ज़बां से क्या में कहूं ...
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