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जाइरे तैबा रोज़े पे जा कर

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जाइरे तैबा रोज़े पे जा कर

ज़ाइर-ए-तैबा रोज़े पे जा कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना
मेरे ग़म का फ़साना सुना कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना

तेरी क़िस्मत पे रश्क आ रहा है, तू मदीने को तू जा रहा है
आह ! जाता है मुझको रुला कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना

जब पहुँच जाए तेरा सफीना, जब नज़र आये मीठा मदीना
बा-अदब अपने सर को जुका कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना

जब के आये नज़र प्यारा मक्का, चुम लेना नज़र से तू का'बा
हो सके गर तो हर जा पे जा कर, तू सलाम उनसे रो रो के कहना

तू 'अरब की हसीं वादियों को, रेगज़ारों को आबादियों को
मेरी जानिब से पलकें बिछा कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना

जबकि पेश-ए-नज़र जालियां हों, तेरी आँखों से आंसू रवां हों
मेरे गम की कहानी सुना कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना

आमेना के दुलारे को पहले, बाद शेख़ैन को भी तू कह ले
फिर बक़ी-ए-मुबारक पे जा कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना

माँगना मत तू दुनिया की दौलत, माँगना उनसे बस उनकी उल्फत
खूब दीवाने दिल को लगा कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना
 
मेरे आक़ा के मेहरब-ओ-मिम्बर, उनकी मस्जिद की दीवारें और दर
क़ल्ब की आँख उन पर जमा कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना
 
प्यारी-प्यारी वो जन्नत की क्यारी, चुम लेना निगाहों से सारी
बहर-ए-रहमत में गोता लगा कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना
 
सब्ज़ गुम्बद के दिलकश नज़ारे, रूह परवर वहां के मीनारे
उनके जलवों में खुद को गुमा कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना
 
वो शहीदों के सरदार हम्ज़ा, और जितने वहाँ हैं सहाबा
तू सभी की मज़ारों पे जा कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना
 
कहना अत्तार अये शाहे आली ! है फकत तुजसे तेरा सुवाली
तू सुवाल इसका पूरा शहा कर, तू सलाम उनसे रो-रो के कहना
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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