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ज़माना हज का है जलवा दिया है शहीद-ए-गुल को

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ज़माना हज का है जलवा दिया है शहीद-ए-गुल को

ज़माना हज का है जलवा दिया है शहीद-ए-गुल को

इलाही ताकत-ए-परवाज़ दे पर हाए बुलबुल को

 

मिले लब से वो मुशकेन मोहर वाली दम माई दम आए

तपक सुन कर क़ुम ईसा कहूँ मस्ती माई बुलबुल को

 

दो शम्बा मुस्तफ़ा का जुम्मा-ए-आदम से बेहतर है

सिखाना क्या लिहाज़-ए-हैसियत खु-ए-तअम्मुल को

 

रज़ा ये सब्ज़ा-ए-गरदू है वो कोतल जिसके मोकाब के

कोई क्या लिख ​​सके इसकी सवारी के तजम्मुल को

Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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