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ज़िन्दगी एक किराए का घर है

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ज़िन्दगी एक किराए का घर है

ज़िन्दगी एक किराए का घर है , एक ना एक दिन बदलना पड़ेगा
मौत जब तुझको आवाज़ देगी , घर से बाहर निकलना पड़ेगा

रूठ जाएंगी जब तुजसे खुशियां, गम के ढाँचे में ढलना पड़ेगा
वक़्त ऐसा भी आएगा नादाँ , तुझको काँटों पे चलना पड़ेगा

इतना माज़ूर हो जायेगा तू , इतना मजबूर हो जायेगा तू
ये जो मखमल का चोला है तेरा, ये कफ़न में बदलना पड़ेगा

कर ले इमां से दिल की सफाई , छोड़ दे छोड़ दे तू बुराई
वक़्त बाकी है अब भी संभल जा, वरना दोज़ख में जलना पड़ेगा

ऐसी हो जायेगी तेरी हालत, काम आएगी दौलत ना ताकत
छोड़ कर अपनी ऊँची हवेली , तुझको बाहर निकलना पड़ेगा

जलवा-इ-हुस्न भी जा बजा है, और खतरा तो भी है ज़ियादा
ज़िंदगानी का ये रास्ता है, हर क़दम पर संभालना पड़ेगा

बाप, बेटे, ये भाई, भतीजे, तेरे साथी हैं ये जीते जीते
अपने आँगन से उठना पड़ेगा, अपनी चौखट से टलना पड़ेगा

है बहोत ही बुरी चीज़ दुनिया, क्यों समझता है दुनिया को अपना
बाज़ आजा गुनाहों से वरना , उम्र भर हाथ मलना पड़ेगा

प्यार से सबको अपना बना ले, जिस क़दर हो सके तू दुआ ले
मत लगा आग नफरत की नादाँ, वरना तुझको भी जलना पड़ेगा

बाल से भी बारीक है रास्ता, और तलवार से भी तेज़ तर है
उसपे गठड़ी गुनाहों की ले कर , हश्र में तुझको चलना पड़ेगा

गम के मारों की हालत में नादाँ, हस रहा है मगर याद रख ले
अश्क बन बन के आँखों से अपनी , एक दिन तुझको ढलना पड़ेगा

क़ब्र में जिस गड़ी जाएगा तू , नेकियाँ काम आएंगी तेरे
बाज़ आजा गुनाहों से वरना , हश्र तक हाथ मलना पड़ेगा

चाहता है अगर सुर्ख रुई , चाहता है अगर नेक नामी
ये अदा छोड़नी होगी तुझको , इस चलन को बढ़ना पड़ेगा

है अगर तुझको इंसान बनना, तो यकसर मेरी बात सुन ले
छोड़नी होगी हर एक बुराई , ख्वाहिशों को कुचलना पड़ेगा
Mohammad Wasim

Mohammad Wasim

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