अल्लाह की मर्ज़ी पे जो क़ुर्बान हुआ है
शान उसको मिली साहिबे ईमान हुआ है
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
क़ुरबानी का इस्लाम में है मर्तबा अफ़ज़ल
क़ुरबानी से हो जाता है ईमान मुकम्मल
आदम से मसीहा तलक आये जो पयम्बर
क़ुर्बानियां देते रहे सब नाम खुदा पर
क़ुरबानी का पैगाम जहां को दिया सब ने
इकरार किया अज़मते क़ुरबानी का सब ने
क़ुरबानी का पूरा हुआ इकरार वफ़ा का
क़ुरबानी से बन्दों को मिला क़ुरब खुदा का
क़ुरबानी को ईमान का जुज़ जान लो बन्दों
तुम दिल से हर एक हुक्मे खुदा मान लो बन्दों
सर अपना जुकाते रहो पैगामे खुदा पर
क़ुरबानी दिलो जान से दो नामे खुदा पर
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
क़ुरआन में है क़ुरबानी की तकमील का किस्सा
के हज़रते इब्रहिमो इस्माइल का किस्सा
थे हज़रत इब्राहिम बड़े साहिबे अज़मत
अल्लाह ने अता की थी उन्हें शाने रिसालत
नबियों में बड़े मर्तबे वाले थे बराहीम
करते थे सभी जिन्नो बशर आप की ताज़ीम
रब्ब ने उन्हें रेहमत से सरफ़राज़ किया था
और उनको खलीलुल्लाह का ऐजाज़ दिया था
उनके सिवा ये शान किसी ने नहीं पायी
नस्ल उनसे ही अल्लाह ने नबियों की चलाई
हर चीज़ लुटा देते थे वो रब्ब की रज़ा पर
थे आप दिलो जान से क़ुर्बान खुदा पर
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
क़ुरआन बयां करता है ये किस्सा-इ-अज़मत
एक शब् दी उन्हें ख्वाब में अल्लाह ने बशारत
क़ुरबानी मेरे नाम पे देदो अये बराहीम
ये हुक्म है मेरा इसे मानो अये बराहीम
जब सुब्ह को बेदार हुए रब्ब के पयम्बर
सो ऊंटों को क़ुर्बान किया नामे खुदा पर
फिर दूसरी शब् भी ये बशारत मिली उनको
अल्लाह ने क़ुरबानी की तलकीन की उनको
तकमील बराहीम ने की हुक्मे खुदा की
सो ऊंटों को क़ुर्बान किया दुसरे दिन भी
फिर तीसरी शब् भी ये बशारत मिली रब्ब से
क़ुरबानी दो उसकी जो तुम्हें प्यारा हो सबसे
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
तब समजा खलीलुल्लाह ने मौला का इशारा
सोचा के इस्माइल मुझे सबसे है प्यारा
अल्लाह को मंज़ूर है क़ुरबानी उसी की
पूरी में करूँगा जो है अल्लाह की मर्ज़ी
हर इम्तेहान में दे दूंगा इसारो वफ़ा का
मानूंगा दिलो जान से में हुक्म खुदा का
बोले तेरी मर्ज़ी मेरा ईमान है मौला
जो तुने दिया तुजपे वो क़ुर्बान है मौला
हट कर तेरी राहों से तो में चल नहीं सकता
कुछ भी हो मगर हुक्म तेरा टल नहीं सकता
बेटे को तेरे नाम पे क़ुर्बान करूंगा
इस तरह में आरास्ता ईमान करूँगा
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
फिर प्यार से बेटे को करीब अपने बुलाया
मुंह चूमा महोब्बत से गले अपने लगाया
बोले के मुझे तुम हो दिलो जान से प्यारे
हर एक तमन्ना से हर अरमान से प्यारे
दिल चाहे के में तुमपे दिलो जान लुटा दूँ
साँसों में बसा दूँ तुम्हें आँखों में जगह दूँ
रक्खु सदा हर हाल में मसरूर में तुमको
एक पल भी न नज़रों से करूँ दूर में तुमको
लेकिन ये गाड़ी इम्तेहान की मुझपे है भारी
मांगी है मेरे अल्लाह ने क़ुरबानी तुम्हारी
उल्जन में हूँ उल्जन ये मेरी तुम्ही मिटा दो
क्या इसमें तुम्हारी है रज़ा मुझको बता दो
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
ये बात इस्माइल ने जब सुन ली पिदर की
ये कहने लगे जो मेरे अल्लाह की मर्ज़ी
खुश जिसमें मेरा रब्ब है मेरी उसमें ख़ुशी है
ये जान तो मुझको मेरे मौला ने ही दी है
क्यों जान न क़ुर्बान करूँ नामे खुदा पर
नाज़ इस्पे है मुझको के मरुँ नामे खुदा पर
ये ज़िन्दगी मुझसे मेरी जब चाहे खुदा ले
ये जिसकी अमानत है उसी के है हवाले
अल्लाह की मर्ज़ी में पसो पेश न कीजिये
क़ुरबानी मेरी नाम पे अल्लाह के दीजिये
माज़ूर दिलो जान से है जो हुक्मे खुदा है
हर हाल में सर सामने अल्लाह के जुका है
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
ये बात खलीलुल्लाह ने सुन ली जो पिसर की
तो हो गए हिम्मत पे फ़िदा नूरे नज़र की
फिर शुक्रे खुदा करने लगे हाथ उठा कर
होने को है क़ुर्बान पिसर तेरी रज़ा पर
ये तेरा है अहसान करम मुझपे तेरा है
बेटे ने तेरे हुक्म पे लब्बैक कहा है
ये हुक्म तेरा मान के राज़ी किया तुझको
शर्मिंदा तेरे आगे न होने दिया मुझको
है तुजसे गुज़ारिश यही मेरी मेरे अल्लाह
क़ुर्बानी तू मक़बूल कर इसकी मेरे अल्लाह
औलाद दी जो तुने वो तुझपर ही फ़िदा है
ये तेरा करम तेरी इनायत है अता है
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
पहनाये नए कपडे महोब्बत से पिसर को
और ले चले मकतल की तरफ लख्ते जिगर को
ये जज़्बा-इ-क़ुरबानी तो उनका कोई देखे
बढ़ते थे इस्माइल बराहीम से आगे
शैतान ने बहकाने की कोशिश जो उन्हें की
शैतान पे इस्माइल ने लानत वहीँ भेजी
शैतान ने शब्बार की बहकाने की कोशिश
आयी न मगर पा-इ-इस्माइल में लग़्ज़िश
कंकरियों से शैतान को वहीँ आप ने मारा
अल्लाह के बन्दे को था अल्लाह का सहारा
बढ़ते रहे आगे ही वो साबित क़दमी से
होने चले अल्लाह पे क़ुर्बान ख़ुशी से
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
अल-किस्सा पिसर और पिदर आन से पहुंचे
क़ुरबानी के मरकज़ पे बड़ी शान से पहुंचे
इस अज़्म पे थे दोनों के हैरान फ़रिश्ते
अल्लाह के हुज़ूर आये परेशान फ़रिश्ते
रो रो के फरिश्तों ने गुज़ारिश की खुदा से
साये में इस्माइल को ले फ़ैज़ा अता से
इंसानों की क़ुरबानी की गर रस्म चलेगी
या रब्ब कहीं दुनिया में महोब्बत न रहेगी
तु आज इस्माइल की क़ुरबानी जो लेगा
हर साहिबे हक़ बेटों को क़ुर्बान करेगा
रो रो के ये कहते थे फ़रिश्ते
थीं मस्लेहतें एज़ दीं अये मोमिनों कुछ और
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
क़ुर्बान यूँ क़ुर्बानी की अज़मत पे थे दोनों
राज़ी बा-रज़ा हुक्म मशिय्यत पे थे दोनों
जब बंदगी अल्लाह की दोनों ने अदा की
क़ुरबानी की तैयारी बराहीम ने कर ली
फिर तेज़ छुरी कर ली खलीलुल्लाह ने बड़ के
बेटे को लिटाया वहीँ रस्सी से जकड के
तब बोले इस्माइल गुज़ारिश है ये मेरी
अल्लाह के लिए बांधिए आप आँखों पे पट्टी
मुज पर दमे क़ुरबानी कहीं प्यार न आये
ये पिदृ महोब्बत है कहीं जोश न खाए
आँखों पे खलीलुल्लाह ने तब बांध ली पट्टी
तामील वो फिर करने लगे हुक्मे खुदा की
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
क्या जज़्बा-इ-क़ुरबानी था क्या दिल था क्या जिगर था
सर देने को तैयार पयम्बर का पिसर था
अल्लाह का लिया नाम बा-सद इश्क़े इलाही
फिर बेटे की गर्दन पे छुरी बाप ने फेरी
वो फेरते जाते थे छुरी नामे खुदा से
पर कुंद छुरी हो गयी मौला की रज़ा से
बेटे पे न आंच आयी बहोत ज़ोर लगाया
ऐसे में ये क़ुदरत का करिश्मा नज़र आया
जिब्रीले अमीन को वहाँ अल्लाह ने भेजा
साथ अपने ही जन्नत से ले आये थे वो दुम्बा
दुम्बे को इस्माइल के बदले में लिटाया
और प्यारे इस्माइल को मक़्तल से हटाया
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
अब के जो छुरी हज़रते इब्राहिम ने फेरी
चलने लगी आसानी से उस वक़्त छुरी भी
जिस वक़्त की क़ुरबानी खलीलुल्लाह ने पूरी
आँखों से पयम्बर ने वहीँ खोल दी पट्टी
जब आपने देखा तो नज़ारा ही जुदा था
बदले में इस्माइल के एक दुम्बा पड़ा था
ये देख के मंज़र हुए हैरान बराहीम
जिब्रील ने की बड़ के वहीँ आप की ताज़ीम
जिब्रील ने पहुंचा के सलाम उनको खुदा का
वल्लाह दिया फिर वो पयाम उनको खुदा का
हैरान न हों आप मशिय्यत पे खुदा की
अब शुक्र अदा कीजिये रेहमत पे खुदा की
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
कर लीजिये क़ुबूल आप ये अल्लाह का तोहफा
बदले में इस्माइल के भेजा है ये दुम्बा
क़ुरबानी इस्माइल की मक़बूल की रब्ब ने
और उनको जबीउल्लाह की अज़मत भी दी रब्ब ने
क़ुरबानी पे बेटे की हुए आप जो राज़ी
तो आप से राज़ी हुआ ख़ल्लाक़े जहां भी
ये आपका ईसार ये क़ुरबानी का जज़्बा
देखा तो बहोत आपसे खुश हो गया मौला
शान आपकी ता-हश्र यूँहीं बड़ती रहेगी
क़ुरबानी की ये रस्म भी ता-हश्र चलेगी
दी रब्ब ने बराहिमो इस्माइल को अज़मत
और रुक्न बानी हज का ये क़ुरबानी की सुन्नत
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
इस रस्म को ज़िंदा किया फिर सिब्ते नबी ने
क़ुर्बान किया खुद को हुसैन इब्ने अली ने
अये मोमिनों ये अज़मते सुल्ताने शहीदां
औलाद भी क़ुर्बान की खुद भी हुए क़ुर्बान
शब्बीर ने हक़ के लिए क़ुरबानी जो दी है
ईसारे इब्राहिम की तकमील हुई है
सजदे में जो गर्दन शहे कर्बल के कटा दी
क़ुरबानी जबीउल्लाह की फिर याद दिला दी
बेशक हैं पयाम आप जबीउल्लाह के वारिस
हैं लाडले ज़हरा के खलीलुल्लाह के वारिस
अये मोमिनों चलते रहो मौला की रज़ा पर
क़ुरबानी सदा देते रहो नामे खुदा पर
क़ुरबानी का किस्सा है, तारीख का हिस्सा है
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